कुरआन क्या है ?

अनाथों का माल नाहक तरीके से प्रयोग करना भी महा पापों में से है।

अनाथों का माल नाहक तरीके से प्रयोग करना भी महा पापों में से है।

अनाथों का माल नाहक तरीके से प्रयोग करना भी महा पापों में से है।

अनाथ के मालों को नाहक तरीके से प्रयोग करना भी महा पापों में से है। अल्लाह तआला ने दुनिया में हमें एक नियुक्त समय के लिए जीवन प्रदान की है। प्रत्येक मानव को अपनी दुनियावी आयु गुजार कर आखिरत की ओर जाना है। जब किसी के मृत्यु का समय आ जाता है, तो फिर उसे कुछ भी कुछ मुह्लत नहीं दी जाती है, और एक परिवार का सब से महत्वपूर्ण व्यक्ति इस दुनिया से चला जाता है। सब से बड़ा गम और दुःख का समय उस के संतान को उठाना पड़ता है, जबकि बच्चे छोटे हों। बच्चे की पालन पोशन के साथ साथ बच्चे की शिक्षा और तर्बियत की सब से बड़ी समस्या पेश आ जाती है। इस के साथ मामाला अधिक खतरनाक हो जाता है, जब इस अनाथ बच्चे के माल के रखवाले ही खद्दारी और धोखे पर उतर जाते हैं और अनाथ के माल को अपने नाम कर लेते और अनाथ को उस के माल से वंचित कर देते या अनाथों के माल को नाहक तरीके से प्रयोग करना आरम्भ कर देते हैं। इसी लिए अल्लाह ने अनाथ के धन दौलत की जिम्मेदारी को सही तरीके और न्याय के साथ उठाने वाले व्यक्तियों को बहुत पुण्य का वादा किया है। जो लोग अमानत के मामले में कमज़ोर हैं, तो वह इस जिम्मेदारी से दूर ही रहें। इसी में उन के लिए दुनिया और आखिरत में भलाइ है।

अल्लाह ने अनाथ के मालों से दूर रहने का आदेश दियाः

जो लोग अमानत के साथ अनाथ बच्चे के धन दौलत की देख रेख की जिम्मेदरी नहीं उठा सकते हैं, ऐसे लोगों को अनाथ के मालों से दूर रहने का आदेश दिया गया है। क्योंकि अनाथ का माल ना हक्क तरीके से खाना बहुत बड़ा पाप है। इसी कारण अल्लाह तबारक ने अनाथों के माल से दूर रहने का आदेश दिया है। अल्लाह का फरमान हैः

وَلَا تَقْرَ‌بُوا مَالَ الْيَتِيمِ إِلَّا بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ حَتَّىٰ يَبْلُغَ أَشُدَّهُ ۚ وَأَوْفُوا بِالْعَهْدِ ۖ إِنَّ الْعَهْدَ كَانَ مَسْئُولًا. (سورة الإسراء: 34

और अनाथ के माल को हाथ न लगाओ सिवाय उत्तम रीति के, यहाँ तक कि वह अपनी युवा अवस्था को पहुँच जाए, और प्रतिज्ञा पूरी करो। प्रतिज्ञा के विषय में अवश्य पूछा जाएगा। (सूरह इस्राः 34)

अनाथ व्यस्क हो जाए तो उसका धन बिना कमी के उसे वापस की जाएः

जब अनाथ व्यस्क हो जाए, अपने माल और धन दौलत की रक्षा की जिम्मेदारी उठाने के काबिल हो जाए तो उन्हें उस का माल बिना किसी कमी के उन्हें लैटाया जाए। अनाथों के माल में मिलावट से मना किया गया है। ताकि उनके माल को नाहक तरीके से न खाया जाए।

وَآتُوا الْيَتَامَىٰ أَمْوَالَهُمْ ۖ وَلَا تَتَبَدَّلُوا الْخَبِيثَ بِالطَّيِّبِ ۖ وَلَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَهُمْ إِلَىٰ أَمْوَالِكُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ حُوبًا كَبِيرً‌ا.(سورة النساء: 2

और अनाथों को उनका माल दे दो और बुरी चीज़ को अच्छी चीज़ से न बदलो, और न उनके माल को अपने माल के साथ मिला कर खा जाओ। यह बहुत बड़ा गुनाह हैं।  (सूरह अन्निसाः 2)

अनाथ का माल नाहक तरीके से खाना सात विनाश करने वाले कार्य में से हैः

अनाथ और यतिमों का माल ना हक तरीके से खाना सर्वनाश करने वाले पापों में से है। जिसे रसूल (सल्ल) ने विनाश करने वाले कार्य में शुमार कर वाया है और उस के प्रति चेतावनी दे दी है          और उस से दूर रहने का आदेश दिया हैः

عن أبي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ: اجْتَنِبُوا السَّبْعَ الْمُوبِقاتِ قَالُوا: يا رَسُولَ اللهِ وَما هُنَّ قَالَ: الشِّرْكُ بِاللهِ، وَالسِّحْرُ، وَقَتْلُ النَّفْسِ الَّتي حَرَّمَ اللهُ إِلاَّ بِالْحَقِّ، وَأَكْلُ الرِّبا، وَأَكْلُ مَالِ الْيَتيمِ،وَالتَّوَلِّي يَوْمَ الزَّحْفِ، وَقَذْفُ الْمُحْصَنَاتِ الْمُؤْمِناتِ الْغافِلاتِ. (صحيح البخاري: 2766, صحيح مسلم:89

अबू हुरैरा(रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि रसूल(सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः “ सात सर्वनाश करने वाली चीजों से बचो, लोगों ने प्रश्न किया, वह क्या हैं, ऐ अल्लाह के रसूल ?, तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः अल्लाह के साथ शिर्क, जादू, बेगुनाह की हत्या, अनाथों का माल नाहक खाना, ब्याज़ खाना, युद्ध की स्थिति में युद्धस्थल से भागना, भोली भाली पवित्र मूमिन महिलाओं पर प्रति आरोप लगाना। (सही बुखारीः 2766 और सही मुस्लिमः 89)

इस हदीस में स्पष्ट रूप से अनाथ के माल को ना हक तरीके से खाने वाले के आखिरत के खराब होने की खबर दी गई है।

अनाथ का माल नाहक तरीके से खाना जहन्नम में दाखिल करने वाले कार्य में से हैः

अनाथों के धन दौलत की रेख देख करने वाले व्यक्ति अनाथों के मालों में हेरा फेरी न करे, और नहीं अच्छे दुकान या सामान अपने नाम कर ले और साधारण दुकान या उन्हें नाहक तरीके से वंचित कर के उनका माल हड़प कर ले क्योंकि यह महा पाप में से है और जो लोग अनाथों का माल नाहक तरीके से खाते हैं। या यतिमों के धन दौलत और जमीन को रिश्वत दे कर अपने नाम कर लेते हैं। तो ऐसे लोग अपने पैट में आग दाखिल कर रहे हैं और निश्चय यह लोग नरक में दाखिल होंगे। अल्लाह तआला स्पष्ट रूप में चेतावनी दे दी है। अल्लाह तआला का फरमान हैः

إِنَّ الَّذِينَ يَأْكُلُونَ أَمْوَالَ الْيَتَامَىٰ ظُلْمًا إِنَّمَا يَأْكُلُونَ فِي بُطُونِهِمْ نَارً‌ا ۖ وَسَيَصْلَوْنَ سَعِيرً‌ا. (سورة النساء: 10

जो लोग अनाथों के माल अन्याय के साथ खाते हैं, वास्तव में वे अपने पेट आग से भरते हैं, और वे अवश्य भड़कती हुई जहन्नम (नरक) में जा पड़ेंगे। (सूरह अन्निसाः 10)

अनाथ हो जाना ही एक मुसीबत है जिस पर सब्र करना अल्लाह की रहमत का कारण है और फिर अनाथ के माल को नाहक तरीके से खाना बहुत पाप है जिस में लिप्त व्यक्ति को अल्लाह तआला ने जहन्नम में डालने की चेतावनी दे दी है। अल्लाह हमें नेक बनाए और क़ुरआन तथा हदीस पर अमल करने की शक्ति प्रदान करे। किसी पर भी अत्याचार और जुल्म करने से सुरक्षित रखे। आमीन

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