कुरआन क्या है ?

अल्लाह और रसूल (सल्ल) के प्रति बिना ज्ञान के कहना महा पाप है

अल्लाह और रसूल पर झूट गढनाअल्लाह और  रसूल (सल्ल) के प्रति बिना ज्ञान के कहना महा पाप है। इसी प्रकार अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर झूट बात गढ़ कर कहना भी महा पाप है। जिसे अल्लाह ने वर्जित किया है और जिस में लिप्त व्यक्ति बहुत बड़ा पापी होगा।  अल्लाह तआला का फरमान है।

قُلْ إِنَّمَا حَرَّ‌مَ رَ‌بِّيَ الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ‌ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ وَالْإِثْمَ وَالْبَغْيَ بِغَيْرِ‌ الْحَقِّ وَأَن تُشْرِ‌كُوا بِاللَّـهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِ سُلْطَانًا وَأَن تَقُولُوا عَلَى اللَّـهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ. (سورة الاعراف: 33

कहदो,” मेरे रब ने अश्लील कर्मों को हराम किया है – जो उनमें से प्रकटहो उन्हें भी और जो छिपे हो उन्हें भी- पापों को भी औरनाहक़ ज़्यादती औरइस बात को कि तुम अल्लाह का साझीदार ठहराओ, जिसके लिए उसने कोई प्रमाण नहींउतारा और इस बात को भी कि तुम अल्लाह पर थोपकर ऐसी बात कहो जिसका तुम्हेंज्ञान न हो।” (सूरह अल्आराफः 33)

अल्लाह की ओर अज्ञानता से बोलना भी बहुत बड़ा पाप है और मानव को अल्लाह के प्रति सही बात और ज्ञान के साथ बोलना चाहिये और झूटी बात या बिना ज्ञान के बोलना नहीं चाहिये। अल्लाह के इस कथन पर ध्यान दें।

 وَلَا تَقُولُوا لِمَا تَصِفُ أَلْسِنَتُكُمُ الْكَذِبَ هَـٰذَا حَلَالٌ وَهَـٰذَا حَرَ‌امٌ لِّتَفْتَرُ‌وا عَلَى اللَّـهِ الْكَذِبَ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُ‌ونَ عَلَى اللَّـهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ- مَتَاعٌ قَلِيلٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ. ﴿النحل

और अपनी ज़बानों के बयान किए हुए झूठ के आधार पर यहन कहा करो,” यह हलाल है और यह हराम है” ताकि इस तरह अल्लाह पर झूठ आरोपित करो। जो लोग अल्लाह से सम्बद्ध कर के झूठ घड़ते है, वे कदापि सफल होने वाले नहीं उपभोग थोड़ा है, और उनके लिए वास्तव में बहुत दुखद यातना है। (सूरह अन्नहलः 117)

وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ تَرَ‌ى الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَى اللَّـهِ وُجُوهُهُم مُّسْوَدَّةٌ ۚ أَلَيْسَ فِي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِّلْمُتَكَبِّرِ‌ينَ. (سورة الزمر: 60

और क़ियामत के दिन तुम उन लोगों को देखोगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ घढ़ कर थोपा है कि उनके चेहरे काला है। क्या अहंकारियों का ठिकाना जहन्नम में नहीं हैं ?” (सूरह अज्ज़ुमरः 60)

इसी प्रकारम रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी स्पष्ट कर दिया है कि मानव का परस्पर झूट बोलना भी बड़ा पाप है, परन्तु अल्लाह तआला तथा रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर झूट बोलने का पाप अत्यन्त बढ़ जाता है। इस हदीस पर विचार करें।

وعن مغيرة بن شعبة رضي الله عنه قال: سمعتُ النبيَّ صلَّى اللهُ عليهِ وسلَّمَ يقولُ: إنَّ كذبًاعليَّ ليس ككذِبٍ على أَحَدٍ، من كذبَ عليَّ متعمدًا فليتبوَّأْ مقعدَهُ من النارِ.  (صحيح البخاري: 1291

मुगीरा बिन शोबा से वर्णन है कि मैं ने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फरमाते हुए सुनाः बेशक मुझ पर झूट बोलना तुम्हारा पारस्परिक झूट बोलने के जैसा नहीं है। जो मुझ पर जानबूझ कर झूट बोलेगा तो वह अपना ठेकाना जहन्नम बना ले।  (सही बुखारीः 1291)

गोया कि अल्लाह और उसके रसूल के प्रति कोई बात या कथन या हदीस मन्सूब करनेसे पहले अच्छेसे खोज और जांच पड़ताल करना चाहिये कि हम जो बात अल्लाह और उस के रसूल (सल्ल)की ओर निस्बत कर रहे हैं, वह बात या हदीस सही सनदों से वर्णित है। यदि वहसही सनद से वर्णित है, तो बिल्कु कहना चाहिये और उस के सवाब प्राप्त करने कीअल्लाह से आशा भी करना चाहिये। परन्तु वह हदीस सही सनद से प्रमाणित नहीं है,तो उस बात को अल्लाह तआला और रसूल (सल्ल) की ओर मन्सूब नहीं करना चाहिये,बल्कि लोगों में फैली हुइ बात से सुचित करना हो, तो उस हदीस की कमज़ोरी औरउस हदीस के प्रति मुहद्देसीन की बातों बयान करना चाहिये ताकि लोगजान लें कि यह हदीस ज़ईफ या मनगढ़त है और इस पर अमल करना अवैध है। और बिना ज्ञान के या झूट गढ़ कर कहने का पाप अपने सर नहीं लेना चाहिये। क्योंकि यह दुनिया नेकी या पाप कमाने का स्थान है और हम अपने कर्म के अनुसार आखिरत में बदला प्राप्त करेंगे। अल्लाह हमें सही समझ दे।। अपने कृपा से जन्नत में प्रवेश करे,,, आमाााााााीन

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