कुरआन क्या है ?

रमज़ान में मेरी योजना

रमजान-में-मेरी-योजना लेखकः खालिद अब्दुल्लाह अल-सब्अ

अनुवादकः सफ़ात आलम मुहम्मद ज़ुबैर

الحمدلله وكفى والصلاة والسلام على عبده الذي اصطفى وبعد

  प्यारे भाई! यह है रमज़ान का मुबारक महीना जो एक बार फिर आ रहा है ताकि आपके ईमान को ताज़ा करे, लेकिन भागदौड़ की इस ज़ींदगी और मश्गुलियतों तथा कामों के होजूम में अल्लाह का प्रदान किया हुआ यह अवसर इंसान के हाथों से निकल जाता है इस लिए हम आपकी सेवा में यह योजना प्रस्तुत कर रहे हैं, शायद अल्लाह तआला की तौफ़ीक़ के बाद इस मुबारक महीने से भलीभाँति लाभ उठाने में सहायक सिद्ध होगा। हम आपको याद दिलाते चलें कि अपनी नीयतों में एख़लास पैदा करें तथा अपने समय को नियमित करें और उसकी पूरे तौर पर पाबंदी करें।

 (1)  दैनिक पांच समय की नमाज़ों में एहराम की तकबीरों की सुरक्षा (150 बार)

प्रमाणः

 من صلى لله أربعين يوماً في جماعة, يدرك التكبيرة الأولى , كتب له براءتان من النار وبراءة من النفاق – رواه الترمذي وهو حسن لغيره

“जिसने पहली तकबीर के साथ चालीस दिन तक जमाअत से नमाज़ अदा की उसके लिए दो बराअत (आज़ादी) लिख दी जाती है, नरक से आज़ादी और नेफ़ाक़ (पाखंड) से आज़ादी ” (तिर्मिज़ी)

(2)  पूरा क़ुरआन ख़त्म करना (कम से कम दो बार)

प्रमाणः

 اقرؤا القرآن فإنه يأتي يوم القيامة شفيعاً لأصحابه –  رواه مسلم

“कुरआन पढ़ा करो कि यह अपने पाठक के लिए महा-प्रलय के दिन सिफारिशी बन कर आएगा.” (मुस्लिम)

(3) एक पारा क़ुरआन याद करना

प्रमाणः

الذي ليس في جوفه شيء من القرآن كالبيت الخرب – رواه البخاري

“जिसके सीने में क़ुरआन का कोई भाग नहीं है वह वीरान घर के समान है। ” (बुख़ारी)

 (4) तरावीह की नमाज़ की सुरक्षा (29 दिन)

प्रमाणः 

  من قام رمضان إيماناً واحتساباً غفرله ما تقدم من ذنبه وما تأخر-  رواه البخاري

“जिसने ईमान के साथ और पुण्य की नीयत से रमज़ान का क़्याम किया (तरावीह पढ़ी) उसके पिछले पाप क्षमा कर दिए जाते हैं”. (बुखारी,मुस्लिम)

(5) रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार, रिश्तेदारों का दर्शन और उनसे संपर्क (कम से कम सप्ताह में एक दिन)

प्रमाणः 

   (الرحم معلقة بالعرش تقول: من وصلني وصله الله ومن قطعني قطعه الله    (رواه مسلم

“दया सिंहासन से लटकी हुई है, और कहती है जो मुझे मिलाएगा अल्लाह उसे मिलाएगा और जो मुझे काटेगा अल्लाह उसे काटेगा”. (मुस्लिम)

 (6) दान और ख़ैरात  (कम से कम सप्ताह में एक बार)

प्रमाणः 

 (كان النبي صلى الله عليه وسلم أجود الناس وأجود ما يكون في رمضان – (رواه البخاري

“अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बहुत ज़्यादा दानशील थे और रमजान में आपकी दानशीलता और बढ़ जाती थी” (बुखारी)

 (7) रोज़ेदार को इफ्तार कराना (30 दिन )

प्रमाणः  

(من فطر صائماً كان له مثل أجره غير أنه لا ينقص من أجر الصائم شيء – ( رواه الترمذي

 “जिसने रोज़ेदार को इफ्तार कराया उसे रोज़ेदार के बराबर पुण्य मिलता है और रोज़ेदार के पुण्य में कोई कमी नहीं की जाती”. (तिर्मिज़ी)

 (जनाज़े की नमाज़ में भाग लेना और जनाज़े के पीछे चलना (कम से कम एक बार 

प्रमाणः

 من صلى على جنازة ولم يتبعها فله قيراط فإن تبعها فله قيراطان قال: أصغرهما مثل أحد –  رواه مسلم

“जो व्यक्ति किसी जनाज़े पर नमाज़ पढ़े उसे एक क़ीरात मिलेगा, और जो उसके पीछे जाए, यहां तक ​​कि उसकी तदफीन हो जाए तो उसको दो क़ीरात मिलेंगे जिनमें से एक क़ीरात उहुद पहाड़ के बराबर होगा” उन में सब से छोटा उहुद पहाड़ के बराबर है।( तिर्मिज़ी)

(9) उमरा की अदाएगी (एक बार)

प्रमाणः 

 (عمرة في رمضان تقضي حجة أو حجة معي – (رواه البخاري

“रमजान में उमरा करना हज के बराबर है या मेरे साथ हज करने के बराबर है” (बुखारी)

(10) सप्ताह में एक इस्लामी केसीट सुनना (4 केसीट्स, हर सप्ताह एक केसीट )

 (11)  दीनी पुस्तकों का अध्ययन ( पूरे महीना 15 घंटे, प्रति दिन आधा घंटा के दर से )

 (12)  दावत के कामों में भाग लेना और कम से कम एक व्यक्ति की हिदायत की चिंताः

प्रमाणः

 (لأن يهدي الله بك رجلاً واحداً خير لك من أن يكون لك حمر النعم  –  (رواه مسلم

“यदि अल्लाह तेरे द्वारा एक व्यक्ति को (इस्लाम के ) रास्ते पर ला दे तो तुम्हारे लिए (अरब) के लाल ऊंटों से उत्तम है”. (मुस्लिम)

  फ़जर की नमाज़ के बाद मस्जिद में एतकाफ़ (बैठना) और सूर्योदय के बाद दो रकअत की अदाएगी  कम से कम चार बार

प्रमाणः

 من صلى الفجر في جماعة ثم قعد يذكر الله حتى تطلع الشمس ثم صلى ركعتين كانت له كأجر حجة وعمرة تامة تامة تامة  –  رواه الترمذي

“जिस व्यक्ति ने सुबह की नमाज़ जमाअत से अदा की, फिर अपनी जगह बैठा अल्लाह के ज़िक्र में लगा रहा, यहाँ तक कि सूर्योदय हो गया, उस के (15, 20 मिनट के) बाद दो रकअत नमाज़ पढ़ी तो उसे एक हज और एक उमरा का पूरा पूरा पुण्य मिलता है”. (तिर्मिज़ी)

 (14) वित्र की नमाज़ की पाबंदी ( 30 बार)

प्रमाणः

 أو صاني خليلي صلى الله عليه وسلم بثلاث صيام ثلاثة أيام من كل شهر وركعتي الضحى وأن أوتر قبل أن أنام  –  رواه البخاري

अबु हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं: नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझे तीन चीज़ों की वसीयत की, हर महीना तीन रोज़े, चाश्त की दो रकअतें, और यह कि सोने से पहले वित्र पढ़ लूँ “(बुख़ारी)

(15)  दैनिक पांच समय की नमाज़ों के पश्चात ज़िक्र की पाबंदी (150 बार)

प्रमाणः अल्लाह ने फ़रमाया: “

 وَالذَّاكِرِينَ اللَّـهَ كَثِيرًاوَالذَّاكِرَاتِ أَعَدَّ اللَّـهُ لَهُم مَّغْفِرَةً وَأَجْرًا عَظِيمًا –  ﴿الأحزاب: 35

“और अल्लाह को अधिक याद करने वाले पुरुष और याद करने वाली स्त्रियाँ – इनके लिए अल्लाह ने क्षमा और बड़ा प्रतिदान तैयार कर रखा है।”. (अहज़ाब 35)

 (16) दैनिक दुआ का आयोजन ( 30 बार )

प्रमाणः अल्लाह ने फरमाया:

 ( ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ    (سورة الغافر 60  

 “तुम मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी प्रार्थनाएँ स्वीकार करूँगा।” (सूरः अल-ग़ाफ़िर 60)

 (17) ज़कात की अदाएगी (एक बार)

प्रमाणः अल्लाह ने फ़रमायाः 

 وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَارْكَعُوا مَعَ الرَّاكِعِينَ    – البقرة: 43

”  और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और (मेरे समक्ष) झुकने वालों के साथ झुको”. (सूरः अल-बक़रा 43)

 (18) रमज़ान के अन्तिम दस दिनों की शब बेदारी ( रात में इबादत के लिए जागना 9 रातें)

प्रमाणः

( من قام رمضان إيماناً واحتساباً غفر له ما تقدم من ذنبه – (  متفق عليه

“जिसने ईमान के साथ और सवाब की नीयत से रमजान का क़याम किया उसके पिछले पाप क्षमा कर दिए जाते हैं” (बुखारी, मुस्लिम)

(19) रमज़ान के अन्तिम दस दिनों में एतकाफ़ ( 10 दिन )

प्रमाणः 

كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يعتكف العشر الأواخر من رمضان  رواه البخاري

“अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रमज़ान के अन्तिम दस दिनों का एतकाफ़ किया करते थे”. (बुखारी)

 (20) शबे क़द्र की खोज ( 5 रातें)

प्रमाणः 

   تحروا ليلة القدر في الوتر من العشر الأواخر من رمضان  رواه البخاري

“रमजान के अन्तिम दस दिनों की विषम रातों में शबे कदर की खोज करो”. (बुखारी)

(21) ज़कातुल फित्र की अदाएगी (एक बार)

प्रमाणः

عن ابن عمر: فرض رسول الله صلى الله عليه وسلم زكاة الفطر… رواه البخاري ومسلم

 

इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ज़कातुल फित्र अनिवार्य किया…. (बुखारी, मुस्लिम)

 निर्देश:

1.  हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार संख्या बदल सकता है।

 2. योजना को व्यवहारिक रूप देने की तिथि निर्धारित करना उत्तम रहेगा।

 3.  इस योजना को पहले देखें और दैनिक जिन कामों को व्यवहारिक रूप देलें उन पर पेंसिल से निशान लगाते जायें।

3. इस योजना में अन्य लक्ष्यों की वृद्धि भी की जा सकती है जैसे परिवार और बच्चों के लिए तरबियती प्रोग्राम, दावती अथवा मानव कल्याण सेवा आदि।

4. सर्वशक्तिमान अल्लाह के प्रति समर्पण और इख़लास को ध्यान में रखें और किसी को अपनी योजना की उपलब्धियों से सूचित न करें।

 

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