कुरआन क्या है ?

छींक के शिष्टाचार

इस लेख में छींक के सम्बन्ध में इस्लामी आदेश तथा शिष्टाचार प्रस्तुत किए गए हैं।

इस लेख में छींक के सम्बन्ध में इस्लामी आदेश तथा शिष्टाचार प्रस्तुत किए गए हैं।

एक मुसलमान का पूरा जीवन अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आदेशों के दर्पन में गुज़रता है। छींक जो शरीर को स्वस्थ्य रखने का एक ईश्वरीय उपाय है एक मुसलमाना को दिन और रात में इस से बहुत बार साबक़ा पड़ता है, छींकते समय इस सम्बन्ध में  अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलहैहि व सल्लम  की शिक्षाओं को उसे अपना आदर्श बनाना चाहिए। इसी उद्देश्य के अंतर्गत यह लेख आपकी सेवा में प्रस्तुत किया जा रहा है।  

छींक की परिभाषाः

इमाम इब्ने क़य्यिम रहि. ने  छींक की परिभाषा इस प्रकार की हैः  छींक  दब कर निकलने वाली एक ऐसी हवा है जो मेदे की बंद नली को खोल देती है और यह मरीज़  के लिए अच्छी पहचान  और कुछ बीमारी के समाप्त होने का चिन्ह है। कुछ बीमारियों में ऐसी चीज़े प्रयोग की जाती हैं जिन से बीमार छींकने पर मज़बूर होता है जो  इलाज का एक तरीका और सहायक उपचार है।   ( मिफ्ताह दारुस्सआदह 618 ) 

छींक की हिकमतः 

छींक की हिकमत बयान करते हुए इमाम इब्ने क़य्यिम रहि. अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ज़ादुल मआद  में लिखते हैः 

” छींकने वाले को छींक के बाद एक प्रकार का उपकार और लाभ प्राप्त होता है कि उसके दिमाग़ में एकत्र गैस निकल गया जो यदि बाक़ी रहता तो भ्यानक रोगों का कारण बन सकता था, और जिस प्रकार धरती पर भूकंप आता है उसी प्रकार उसके शरीर में भूकंप आया उसके बावजूद उसके शरीर के सारे अंग ठीक ठाक रहे । अतः इस उपकार से सुसज्जित होने के बाद अति उचित था कि अल्लाह की प्रशंसा बयान की जाए और  अलहमदुलिल्लाह कहा जाए।”  ( ज़ादुल मआद 2/400  )

 और इब्ने मुफ्लिह रहि. अपनी पुस्तक अल- आदाब अश्शरईया में लिखते हैंः

इब्ने हुबैरा कहते हैं कि ” एक इंसान को जब छींक आती है तो यह इस बात की पहचान होती है कि उसका शरीर, उसके खानपान का सिस्टम और उसकी शक्ति बिल्कुल ठीक ठाक है। अतः उचित था कि इस पर वह अल्लाह का शुक्र अदा करे इसी लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने छींक आने पर अल-हम्दुलिल्लाह कहने का आदेश दिया।”  ( अल- आदाब अश्शरईया 493) 

छींक के इस्लामी शिष्टाचारः

(1) छींकने वाले का जवाब देना चाहिएः 

हज़रत अबुहुरैरा रज़ि. का बयान है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः

«إنَّ الله يُحِبُّ العُطَاسَ، وَيَكْرَهُ التَّثَاؤُبَ، فَإذَا عَطَسَ فَحَمِدَ الله فَحَقٌّ عَلَى كُلِّ مُسْلِمٍ سَمِعَهُ أَنْ يُشَمِّتَهُ، وَأَمَّا التَّثَاؤُبُ فَإنَّمَا هُوَ مِنَ الشَّيْطَانِ فَلْيَرُدَّهُ مَا اسْتَطَاعَ، فَإذَا قَالَ: هَاءْ ضَحِكَ مِنْهُ الشَّيْطَانُ»

“अल्लाह छींक को पसंद करता है और जमाई को नापसंद करता है, अतः जब कोई मुसलमान छींके और अल-हम्दुलिल्लाह कहे तो हर मुसलमान जो उसे सुने उस पर उसका जवाब देना अनिवार्य है। और जमाई शैतान की ओर से है जहाँ तक हो सके उसे रोके। जब जमाई लेने वाला मुंह खोल कर “हा” करता है तो शैतान उस पर हंसता है।” (सहीह बुख़ारी 6232) 

(2) जमाई आते समय क्या करना चाहिएः 

जब जमाई आए तो जहां तक सम्भव हो जमाई को रोकना चाहिए, यदि रोक न सकें तो अपना हाथ मुंह पर रख लेना चाहिए। हज़रत अबू हुरैरा रज़ि. का बयान है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः

 التثاؤب من الشيطان ، فإذا تثاءب أحدكم فليكظم مااستطاع  – متفق عليه

“जमाई शैतान की ओर से है, अतः जब तुम में से किसी को जमाई आए तो जहाँ तक हो सके उसको रोके।” (सहीह बुख़ारी 6223, सहीह मुस्लिम 2994) 

हज़रत अबू सईद ख़ुदरी रज़ि. का बयान है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः

 إذا تثاؤب أحدكم فليمسك بيده على  فيه فإن الشيطان يدخل – أخرجه مسلم

” जब तुम में से कोई जमाई ले तो अपना हाथ मुंह पर रख ले इस लिए कि शैतान अंदर चला जाता है।” (सहीह मुस्लिम 2995) 

(3) छींकने वाले को कैसे जवाब दिया जाएगा ?

जब किसी को छींक आए तो उसे चाहिए कि अल-हम्दु लिल्लाह कहे (हज़रत अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद की मौक़ूफ रिवायत से छींक आने पर अल-हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन कहना भी प्रमाणित है। उसी प्रकार तिर्मिज़ी की आने वाली रिवायत में  अल-हम्दुलिल्लाहि अला कुल्लि हाल  कहना भी साबित है।  इस प्रकार छींक आने पर तीन तरीक़ों में से किसी एक तरीक़े से ज़िक्र किया जा सकता है। ) सुनने वाला उसके जवाब में कहेः यरहमुकल्लाह, तब छींकने वाला जवाब देगाः यह्दिकुमुल्लाहु व युस्लिह् बालकुम । हज़रत अबू हुरैरा रज़ि. का बयान है कि अल्लाह के रसूल सल्ल. ने फरमायाः

 «إذَا عَطَسَ أَحَدُكُمْ فَلْيَقُلْ: الحَمْدُ للهِ، وَلْيَقُلْ لَهُ أَخُوهُ أَوْ صَاحِبُهُ: يَرْحَمُكَ الله، فإَذِاَ قَالَ لَهُ: يَرْحَمُكَ الله، فَلْيَقُلْ: يَهْدِيكُمُ الله وَيُصْلِحُ بَالَكُمْ»

” जब तुम में से कोई व्यक्ति छींके तो अल-हम्दुलिल्लाह कहे और उसका भाई या साथी यरहमुकल्लाह कहे, फिर जब वह यरहमुकल्लाह कहे तो छींकने वाला यह्दिकुमुल्लाहु व युस्लिह् बालकुम कहे।” ( सहीह बुख़ारी 6224) 

नाफ़िअ कहते हैं कि एक व्यक्ति को हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि. की बग़ल में छींक आई, उसने कहाः अल-हम्दुलिल्लाह वस्सलामु अला रसूलिल्लाह – हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि. ने कहाः मैं भी अल-हम्दुलिल्लाह वस्सलामु अला रसूलिल्लाह कहता हूं लेकिन रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें ( इस अवसर पर) इस प्रकार कहना नहीं सिखाया है बल्कि यह कहना सिखाया हैः अल-हम्दुलिल्लाहि अला कुल्लि हाल (तिर्मिज़ी 2738)

शैख़ अब्दुर्रज़्ज़ाक़ अल-बदर हफिज़हुल्लाह  इस ज़िक्र का फल्सफ़ा बयान करते हुए लिखते हैंः ” छींक आने पर इस्लाम की सुन्दरता देखें कि सरलतापूर्वक छींक उतर आने पर छींकने वाला अल्लाह की प्रशंसा बयान करता है तो सुनने वाला उसे दुआ देता है कि अल्लाह तुझ पर दया करे, अब छींकने वाला दुआ के बदले में दुआ देता है और उसके मार्गदर्शन तथा उसकी स्थिति की सुधार के लिए दुआ करता है, कितना है यह मज़बूत बंधन और कितना प्यारा है यह रिश्ता और सम्बन्ध।”  ( फिक्हुल अद्इय्यति वल अज़कार 295)  

गैर-मुस्लिम  छींके और अल-हम्दुलिल्लाह कहे तो कैसे जवाब दिया जाएगा ? 

यदि गैर-मुस्लिम मुसलमानों की संस्कृति को जानता हो और वह छींकते समय अल-हम्दुलिल्लाह कहता है तो एक मुसलमान को चाहिए कि उसके जवाब में यह्दिकुमुल्लाहु व युस्लिह् बालकुम कहे। हज़रत अबू मूसा अश्अरी रज़ि. कहते हैं किः

 كَانَتِ اليَهُودُ تَعَاطَسُ عِنْدَ النَّبِيِّ- صلى الله عليه وسلم- رَجَاءَ أَنْ يَقُولَ لَهَا: يَرْحَمُكُمُ الله، فَكَانَ يَقُولُ: «يَهْدِيكُمُ الله، وَيُصْلِحُ بَالَكُمْ». أخرجه أبو داود والترمذي

“यहूद नबी सल्ल. के पास छींकते थे इस आशा के साथ कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम यरहमुकल्लाह कहेंगे परन्तु आप यह्दिकुमुल्लाहु व युस्लिह् बालकुम कहते थे।” (अबू दाऊद 5038, तिर्मिज़ी 2739) 

छींक के समय क्या करना चाहिएः 

जब छींक आये तो तुरंत अपना हाथ अथवा कोई कपड़ा मुंह पर रख लेना चाहिए ताकि स्वर को धीमा किया जा सके। हज़रत अबू हुरैरा रज़ि. कहते हैं कि :

 كَانَ رَسُولُ الله- صلى الله عليه وسلم- إذَا عَطَسَ وَضَعَ يَدَهُ أَوْ ثَوبَهُ عَلَى فِيهِ وَخَفَضَ أَوْ غَضَّ بِهَا صَوتَهُ. أخرجه أبو داود والترمذي

“अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब छींकते थे तो अपना हाथ या कपड़ा मुंह पर रख लेते थे और उस से अपना स्वर धीमा कर लेते थे।” ( सुनन अबी दाऊद 5029, तिर्मिज़ी 2745) 

छींकने वाले का जवाब कब दिया जाएगाः 

जब छींकने वाला अल-हम्दुलिल्लाह कहे तब उसकी छींक का जवाब दिया जाएगा, यदि उसने अल-हम्दुलिल्लाह नहीं कहाः तो उसकी छींक का जवाब नहीं दिया जाएगा। हज़रत अनस बिन मालिक रज़ि. कहते हैं कि :

 عَطَسَ رَجُلانِ عِنْدَ النَّبِيِّ- صلى الله عليه وسلم- فَشَمَّتَ أَحَدَهُمَا وَلَمْ يُشَمِّتِ الآخَرَ، فَقِيلَ لَهُ، فَقَالَ: «هَذَا حَمِدَ الله، وَهَذَا لَمْ يَحْمَدِ الله». متفق عليه

” दो व्यक्तियों ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास छींका, उन में से एक की छींक का जवाब आपने दिया और दूसरे की छींक का जवाब आपने नहीं दिया। आप से उस सम्बन्ध में कहा गया तो आपने फ़रमायाः एक ने अल-हम्दुलिल्लाह कहा और एक ने अल-हम्दुलिल्लाह नहीं कहा।” ( सहीह बुख़ारी 6221, सहीह मुस्लिम 2991) 

छींकने वाले को कितनी बार जवाब दिया जाएगः 

यदि किसी को निरंतर छींक आ रही है तो तीन बार जवाब दिया जाएगा बाक़ी स्थिति में यह समझा जाएगा कि उसे ज़ुकाम है जिसके कारण छींक आ रही है इस लिए उसे شفاك الله  शफाकल्लाह कहा जा सकता है।

हज़रत सल्मा बिन अकवअ रज़ि. का बयान है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः

يُشَمَّتُ العَاطِسُ ثَلاثاً، فَمَا زَادَ فَهْوَ مَزْكُومٌ . أخرجه ابن ماجه

” छींकने वाले को तीन बार जवाब दिया जाए और यदि उस से अधिक उसे छींक आए तो समझो उसको ज़ुकाम है।” (इब्ने माजा 3714)   

छींकने से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण मसाइलः

(1) यदि छींक बाथरूम में आए तो अपने दिल में अल-हम्दु लिल्लाह कह लेना चाहिए।

(2) यदि किसी को नमाज़ की स्थिति में छींक आती है तो उसे चाहिए कि धीमे स्वर में अल-हम्दुलिल्लाह कहे कि बग़ल वाले को भी सुनाई न दे।

(3) अगर फ़ितना का भय न हो तो पुरुष स्त्री की छींक का जवाब और स्त्री पुरुष की छींक का जवाब दे सकता है।

(4) तीसरी बार छींकने के बाद भी किसी को छींक आए तो उसके लिए शिफ़ा और आफियत की दुआ करनी चाहिए, इसके लिए कोई विशेष दुआ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से प्रमाणित नहीं।

(5) जुमा के ख़ुत्बा के बीच अगर किसी को छींक आए तो धीमे से अल-हम्दुलिल्लाह कहे ज़ोर से कहना सही नहीं कि सम्भव है सुनने वाला भी यरहमुकल्लाह कह दे जब कि सुनने वाले के लिए ख़ुतबा के बीच यरहमुकल्लाह कहना जाइज़ नहीं है।

 अन्त में एक पाठः

इब्ने अब्दुल बर्र बयान करते हैं कि इमाम अबू दाऊद (सुनन अबी दाऊद के लेखक) एक नाव में सवार थे, उसी बीच समुद्र के किनारे पर एक व्यक्ति को छींकने के बाद अल-हम्दुलिल्लाह कहते हुए सुना। उन्हों ने एक दिर्हम में एक नाव किराए पर ली यहाँ तक कि छींकने वाले के पास आए और उसकी छींक का जवाब दे कर लौट गए।  इमाम अबूदाऊद रहि. से जब इसका कारण पूछा गया तो उन्हों ने कहाः सम्भव है कि वह ऐसा व्यक्ति रहा हो जिसकी दुआ क़ुबूल होती है। जब लोग कश्ती में सो गए तो कोई कहने वाला यह कह रहा थाः

يا أهل السفينة إن أبا داؤد اشترى الجنة من الله بدرهم

” ऐ नाव के सवारियो!  इमाम अबू दाऊद ने एक दिरहम में अल्लाह से जन्नत ख़रीद ली।”

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