कुरआन क्या है ?

इस्लाम में हंसी मज़ाक का तरीका

मानव एक साथ रहते हैं जिन के जीवन में विभिन्न प्रकार की स्थिति आती रहती है। एक दुसरे2141683461238623710737522321215123061105 के खुशी में साथ देते हैं, एक दुसरे की परेशानी और दुःख के समय में एक दुसरे की सहायता करते हैं। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी विभिन्न प्रकार से लोगों से हंसी मज़ाक किया है, वह हंसी मज़ाक जो झुठ, किसी को दुःख पहुंचाने, चुगुलखूरी इत्यादि से पवित्र होता था।

हंसी मज़ाक का मतलब क्या है

वह बात या हरकत या इशारा जो दुसरे मानव के मुस्कुराहट का कारण बने।

धर्मशास्त्रों ने क़ुरआन करीम और सही हदीसों की रोशनी में हंसी मज़ाक के कुछ नियम बयान किया है ताकि लोग एक दुसरे को खुश भी करे और उन्हें किसी प्रकार का पाप भी न पहुंचे। क्योंकि आज के युग में लोग इस प्रकार के हंसी मज़ाक करते हैं जिस से दुसरे लोगों को नुक्सान पहुंचाने का कारण होता है, या दुसरे के हृदय को ठेस पंहुचाया जाता है। या दुसरे की इज़्ज़त से खेलवाड़ किया जाता है। परन्तु सही तरीका यह है कि हंसी मजाक ऐसे तरीके से हो जिस में दुसरे व्यक्तियों के भावनाओं को ठेस न पहुंचाया जाए और सही तरीके से मुस्कुराहट का मजा लिया जाए।

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के हंसी मज़ाक करने के कुछ तरीके का ज्ञान प्राप्त करते हैं।

كان رسولُ اللهِ صلَّى اللهُ عليهِ وسلَّمَ يدخل علينا ولي أخ ٌصغيرٌ يكنى أبا عُميرٍ وكان له نغرٌ يلعب به فمات فدخل عليه النبيُّ صلَّى اللهُ عليهِ وسلَّمَ ذات يومٍ فرآه حزينًا فقال ما شأنه قالوا مات نغرُه فقال يا أبا عُميرُ ! ما فعل النُّغَيرُ. ( أنس بن مالك.  صحيح أبي دا: 4969)

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे पास तशरीफ लाते थे और हमरा एक छोटा भाई है जिस की कुन्नियत अबू उमैर है, और उसके पास एक छोटा गौरैया का बच्चा था जिस से वह खैलता था तो गौरैया का बच्चा मर गया। तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एक दिन उसके पास तश्रीफ लाए तो उसे दुखी देखा तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसके गम्गी होने का कारण पूछा, तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बताया गया कि उसके गौरैया का बच्चा मर गया जिस कारण वह दुखी है। तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः ऐ अबू उमैर. गौरैया ने क्या किया ?, (सही अबू दाऊदः 4969)

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) दुसरे सहाबी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से भी हंसी मज़ाक किया करते थे। जैसा कि अनस बिन मालिक कहते हैः

ربما قال لي النبي صلى الله عليه وسلم يا ذا الأذنين قال أبو أسامة يعني يمازحه. ( أنس بن مالك  ، صحيح الترمذي:  382)

 नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कभी कभी मुझ से फरमाते थे। ऐ दो कान वाले ! (अबू सल्मा कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन से मज़ाक करते थे।) (सही तिर्मिज़ीः 382)

क्योंकि अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने 10 वर्ष की आयु से नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की 10 वर्ष तक सेवा किया।

इसी प्रकार नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक वृद्धा महिला से मज़ाक किया कि बुढ़ी जन्नत में दाखिल नहीं होगी। जैसा कि हदीस में वर्णन हुआ है।

أنَّ امرأةً عجوزًا جاءتْهُ تقولُ لَهُ : يا رسولَ اللهِ ادع اللهَ لي أنْ يدْخِلَني الجنةَ فقال لَها : يا أمَّ فلانٍ إِنَّ الجنَّةَ لا يدخلُها عجوزٌ وانزعجَتِ المرأةُ وبكَتْ ظنًّا منها أنها لن تدخلَ الجنةَ فلما رأى ذلِكَ منها بيَّنَ لها غرضَهُ أنَّ العجوزَ لَنْ تدخُلَ الجنَّةَ عجوزًا بل يُنشِئُها اللهُ خلقًا آخرَ فتدخلُها شابَّةً بكرًا وتَلَا عليها قولَ اللهِ تعالى : إِنَّا أَنشَأْناهُنَّ إِنشَاءً فَجَعَلْنَاهُنَّ أبْكًارًا عُرُبًا أُتْرَابًا. (غاية المرام: الألباني: 375)

एक वृद्धा महिला आई और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! अल्लाह से मेरे लिए दुआ फरमा दीजीये कि मुझे जन्नत में दाखिल करे, तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)  ने फरमायाः ऐ उम्मे फलाँ ! बेशक जन्नत में वृद्धा प्रवेश नहीं करेगा। तो वह महिला पीछे मुड़ी और रोने लगी तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)  ने उसे रोते देखा तो स्पष्ट किया कि वृद्धा (बुढ़ि) होने की स्थिति में जन्नत में दाखिल नहीं होगी बल्कि उसे अल्लाह तआला नए सिरे से एक जवान कुंवारी के रूप में पैदा करेगा। और यह आयत तिलावत फरमायाः (और वहाँ उनकी पत्नियों को) निश्चय ही हमने एक विशेष रूप में पैदा किया है।- और हमने उन्हे कुँवारियाँ बनाया। प्रेम दर्शानेवाली और समायु।   (सूरह वाक़ियाः 35) (गायतुल मरामः अलबानीः 375)

हंसी मज़ाक का मक्सद क्या होना चाहिये

  • 1-  हंसी मज़ाक नर्मी के साथ, अच्छे शब्दों के प्रयोग के साथ, अपने साथियों को हंसाने के लिए और उनके हृदय में खुशी दाखिल करने के लक्ष्य से हो।

وتبسمك في وجه أخيك صدقة، وإماطتك الحجر والشوك والعظم عن طريق الناس لك صدقة، وهدايتك الرجل في أرض الضالة صدقة. ( صحيح الأدب المفرد: الألباني: 684)

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः और तुम्हारे भाई के लिए तुम्हारी मुस्कुराहट तुम्हारे लिए नेकी है और लोगों के रास्ते से पत्थर और कांटा और हड्डी हटाना नेकी है और भुले हुए व्यक्ति को रास्ता बताना नेकी है। (सही अदबुल मुफ्रदः 684)

इसी प्रकार अब्दुल्लाह बिन अल्हारिस कहते हैः

وعـن عـبـد الله بـن الحارث ـ رضي الله عنهـ قال: “عن عبدِ اللهِ بنِ الحارثِ بنِ جَزءٍ، قال: ما رأيتُ أحدًا أكثرُ تبسُّمًا من رسولِ اللهِ – صلَّى اللهُ عليهِ وسلَّم. (تخريج مشكاة المصابيح: الألباني: 5767)

मैं ने किसी भी दुसरे व्यक्ति को रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक मुस्कुराते हुए नहीं देखा।   (तखरीज मिश्कातुल मसाबीहः अलबानीः 5767

  • 2-  यह हंसी मज़ाक साथियों से बोरियत और एकेले पन को निष्कासन करने और उसके दिल में खुशी दाखिल करने के लक्ष्य से हो ताकि दोनों एक दुसरे के दुःख सुख का साथी बन सके। एक दुसरे की परेशानियों को कम किया जा सके।
  • 3-  हंसी मज़ाक के माध्यम से अपने साथी को डर, खौफ और गुस्से और दुष्चिन्ता और घबराहट से बाहर निकाला जाए। क्योंकि जब अपने दुखी भाई से हंसी मज़ाक करेगा तो वह अपने पुराने गम और परेशानी को भूल जाएगा और उसे कुछ तसल्ली और शान्ति मिलेगी।
  • 4-  हंसी मज़ाक के माध्यम से बोरियत और थकावट से छुटकारा हासिल करने का लक्ष्य हो, ताकि जहन हृदय को शान्ति मिले और फिर से तरो ताज़ा हो कर अच्छे ढ़ंग से अपने काम को अन्जाम दे सके।

हंसी मज़ाक के कुछ नियमः

  • 1-   हंसी मज़ाक में धर्म का मज़ाक न उड़ाया जाए और अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मज़ाक न उड़ाया जाए। क्योंकि इस से मानव धर्म से बाहर हो जाता है, कुछ लोग इसे केवल मज़ाक समझ कर कुछ लोगों को हंसाते हैं और इस की गम्भीर्ता पर विचार नहीं करते हैं। अल्लाह तआला के इस कथन पर चिन्तापूर्वक विचार करें।

وَلَئِن سَأَلْتَهُمْ لَيَقُولُنَّ إِنَّمَا كُنَّا نَخُوضُ وَنَلْعَبُ قُلْ أَباللّهِ وَآيَاتِهِ وَرَسُولِهِ كُنتُمْ تَسْتَهْزِئُونَ،لاَ تَعْتَذِرُواْ قَدْ كَفَرْتُم بَعْدَ إِيمَانِكُمْ  [التوبة:66،65]

और यदि उनसे पूछो तो कह देंगे,”हम तो केवल बातें और उपहास कर रहे थे।” कहो,”क्या अल्लाह, उसकी आयतों और उसके रसूल के साथ हँसी-मज़ाक़ करते थे ? -“बहाने न बनाओ, तुमने अपने ईमान के पश्चात कुफ्र किया।  (सूरह तौबाः 65-66)

हमारे समाज में कुछ लोग तो स्वयं धर्म पर अमल नहीं करते परन्तु कोई व्यक्ति धर्म पर अमल करता है तो वह उसका मज़ाक उड़ाते और कभी कभी मज़ाक इतना ज़्यादा हो जाता है कि अमल करने वाल मज़ाक करने वाले पर बददोआ और शाप दे देता है। एसे कर्मों से बचना चाहिये क्योंकि एक तो आप स्वयं अमल नहीं करते और फिर धर्म पर अमल करने वालों का मज़ाक न उड़ाए।

इसी प्रकार के महा पाप मज़ाक से बचना चाहिये और अल्लाह से और उस व्यक्ति जिस का मज़ाक उड़ाया जाता है, क्षमा मांगना चाहिये। अल्लाह हम सब को इस प्रकार के महा पाप से सुरक्षित रखें। आमीन।

  • 2-  यह हंसी मज़ाक या लतीफा सच्च पर आधारित हो और झूट न हो। क्योंकि झूट बहुत बड़ा पाप है। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमायाः

बेशक आदमी एक ऐशा शब्द का प्रयोग करता है ताकि अपने साथियों को हंसाए परन्तु वह आकाश से भी आगे से गिरता है।  (अस्सिलसिला अस्सहीहाः 78/2)

दुसरी हदीस में झूट बोल कर हंसाने वाले व्यक्ति के प्रति इस प्रकार चेतावनी प्रमाणित है। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का प्रवचन हैः

وَيْلٌ للذي يُحَدِّثُ فيَكْذِبُ لِيُضْحِكَ به القومَ ، وَيْلٌ له، وَيْلٌ له.  (صحيح أبي داؤد: 4990 و صحيح الجامع: 7136)

  • विनाश है उस व्यक्ति के लिए जो झूटे चुटकुले कहता है ताकि लोगों को हंसाए तो उस के लिए विनाश है, और उस के लिए विनाश है । (सही अबू दाऊदः 4990 व सही जामिअः 7136)
  • 3- लोगों के साथ उपहास तथा बुरा हंसी मज़ाक न हो जिस से लगों के हृदय दुखित हों। इसी प्रकार ताना और बुरी उपाधि से लोगों को न हंसा जाए। क्योंकि अल्लाह तआला ने ऐसे हंसी मज़ाक से मना फरमाया हैः जैसा कि अल्लाह का फरमान है।

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا يَسْخَرْ قَومٌ مِّن قَوْمٍ عَسَى أَن يَكُونُوا خَيْراً مِّنْهُمْ وَلَا نِسَاء مِّن نِّسَاء عَسَى أَن يَكُنَّ خَيْراً مِّنْهُنَّ وَلَا تَلْمِزُوا أَنفُسَكُمْ وَلَا تَنَابَزُوا بِالْأَلْقَابِ بِئْسَ الاِسْمُ الْفُسُوقُ بَعْدَ الْإِيمَانِ [الحجرات:11]

ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो! न पुरुषों का कोई गिरोह दूसरे पुरुषों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छे हों और न स्त्रियाँ स्त्रियों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छी हों, और न अपनों पर ताने कसो और न आपस में एक-दूसरे को बुरी उपाधियों से पुकारो। ईमान के पश्चात अवज्ञाकारी का नाम जुडना बहुत ही बुरा है। और जो व्यक्ति (इन पापों से) तौबा न कर ले, तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं।  (सूरह अलहुजरातः 11)

  • 4-  हंसी मज़ाक में किसी को डराया और भयभीत न किया जाए। क्योंकि यह भी पाप में शामिल है। जैसा कि कोई शक्ति शाली व्यक्ति या बन्दूक या हथ्यार से किसी को मज़ाक में न डराय एवं धमकाए। नबी (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) का कथन है।

عن ابن أبي ليلى قال: أنَّهم كانوا يسيرون مع النَّبيِّ صلَّى اللهُ عليه وسلَّم فنام رجلٌ منهم فانطلق بعضُهم إلى حبلٍ معه فأخذه ففزِع فقال رسولُ اللهِ صلَّى اللهُ عليه وسلَّم لا يحِلُّ لمسلمٍ أن يُروِّعَ مسلمًا.  (الترغيب والترهيب:  3/403)

इब्ने अबी लैला से वर्णन है कि साहाबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) नबी (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) के साथ एक यात्रा में थे। तो उन में से एक व्यक्ति सो गए तो उन में कुछ लोग एक रस्सी लेकर उन पर डाल दिया जिस से वह बहुत घबरा कर उठ बैठे तो रसूल (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः किसी मुस्लिम के लिए जाइज़ नहीं कि वह दुसरे किसी मुस्लिम को भयभीत करे।   (अत्तरगीब वत्तरहीबः 403/3)

  • 5-  मज़ाक में भी किसी का सामन ले कर उसे परेशानी और शोक में ग्रस्त करना मना है। जैसा कुछ लोग हंसी मज़ाक में अपने साथियों का समान छुपाते और कभी कभी गाइब ही कर देते हैं। नबी (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) के इस कथन पर विचार करें।

لا يأخُذَنَّ أحدُكُمْ متاعَ صاحِبِهِ لاعِبًا ولَا جادًّا،وإِنْ أخذَ عصا صاحِبِهِ فلْيَرُدَّهَا علَيْهِ.  (صحيح الجامع:العلامة الألباني: 7578)

तुम में कोइ व्यक्ति अपने किसी साथी का सामान मज़ाक और संजीदगी में न ले और उस ने एक लाठी भी लिया है तो उसे उसके मालिक तक लौटा दे। (सही जामिअः अल्लामा अलबानीः 7578)

  • 6-  हंसी मज़ाक बहुत ज़्यादा न हो और हर समय न हो बल्कि स्थिति के अनुसार हो। क्योंकि मूमिन की शान होती है कि वह अल्लाह का जिक्र करे, क़ुरआन की तिलावत करे, क़ुरआन की आयतों पर गम्भीरता से विचार करे, अपनी गलतियों और पापों पर अल्लाह तआला से रो रो कर क्षमा मांगे। परन्तु हमेशा हंसी मज़ाक में ग्रस्त रहना इस लक्ष्य के विरूद्ध है। इसी प्रकार इस्लामी विद्वानों ने कहा है।

उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने कहाः तुम ज़्यादा हंसी मज़ाक से बचो, क्योंकि ज़्यादा हंसी मज़ाक बेवकूफी है जो धृणा उत्पन्न करती है। जिस प्रकार खाना में नमक की मात्रा होती है, इसी प्रकार जीवन में हंसी मज़ाक की मात्रा हो।

रसूल (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) ने अधिक हंसने से मना फरमायाः

 لا تكثر الضحك فإن كثرة الضحك تميت القلب.  [صحيح الجامع:7312)

ज़्यादा न हंसो, बेशक ज़्यादा हंसी हृदय को मृतक बना देती है। (सही जामिअः अल्लामा अलबानीः 7312)

  • 7-  हंसी मज़ाक में लोगों के आयु का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। विद्वान और आम व्यक्ति का फरक का ध्यान रहें। मित्र और अपरिचय व्यक्ति का ध्यान रखना चाहिये। ताकि वकार और आदर-सम्मान का उल्लंघन न हो।
  • 8-  बेवक़ूफों के साथ हंसी मज़ाक न किया जाए। क्योंकि बुद्धिहीन व्यक्ति आप से इस प्रकार हंसी मज़ाक करेगा, जिस की आप कल्पना भी नहीं कर सकते और आप की इज़्ज़त दाव पर लग जाएगी। इस लिए उचित व्यक्ति के साथ, उचित समय में उचित तरीके से हंसी मज़ाक करना चाहिये।
  • 9- लोगों से हंसी मज़ाक करने में दुसरे व्यक्ति की गीबत न की जाए। किसी की चुगुलखूरी न की जाए। किसी की खराबी और गुप्त बातों को प्रकट न किया जाए। क्योंकि यह सख्त मना है, महा पाप में से है। जैसा कि नबी (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः

أتدرون ما الغيبةُ ؟ قالوا: اللهُ ورسولُه أعلمُ. قال :ذكرُكَ أخاكَ بما يكرهُ، قيل: أفرأيتَ إن كان في أخي ما أقولُ ؟ قال: إن كان فيه ما تقولُ، فقد اغتبتَه. وإن لم يكنْ فيه، فقد بهتَّه.  (صحيح مسلم:  2589)

क्या तुम जानते हो कि ग़ीबत किया है ?, तो सहाबा ने कहाः अल्लाह और उसके रसूल अधिक जानते हैं। तो नबी (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः तुम अपने भाई के प्रति वह बात करो जिसे वह ना पसन्द करता हो, कहा गया कि यदि वह बात उस में हो जो बयान किया जा रहा है, तो आप ने फरमायाः यदि उसके प्रति सही बात बयान किया तो यह गीबत है और उसके प्रति झूटी बात बयान किया तो यह उस पर बुहतान है। (सही मुस्लिमः 2589)

हंसी मज़ाक में सब से ज़्यादा प्रयोग जीभ का होता है और यदि मानव जीभ की हिफाज़त करता है। तो वह बहुत ही अच्छा परिणाम प्राप्त कर सकता है और बहुत से पापों से सुरक्षित रह सकता है। रसूल (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) ने क्या ही उत्तम उदाहरण दिया है। रसूल (सल्लल्लम अलैहि व सल्लम) का फरमान हैः

” إذا أصبح ابن آدم فإن الأعضاء كلها تكـفر اللسان فتقول: اتق الله فينا؛ فإنما نحن بك: فإن استقمتَ استقمنا، وإن اعوججتَ اعوججنا.   (سنن الترمذي: 2331 )

जब मानव सुबह उठता है तो पूरे शरीर के अंग जीभ से कहते हैं। हमारे प्रति अल्लाह से भयभीत रहो, हम तुम्हारा अनुसरण करते हैं, यदि तुम सही तरीके से रहे, तो हम भी सही रास्ते पर होंगे। यदि तुम सही रास्ते से हट गए तो हम भी सही रास्ते से भटक जाऐंगे।  (सुनन तिर्मिज़ीः 2331)
अल्लाह तआला से दुआ है कि अल्लाह हमें और आप को धर्म के अनुसार चलने की शक्ति प्रदान करे और दुनिया तथा आखिरत की सफलता दे। आमीन।।।।।।।।।।

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