कुरआन क्या है ?

गुस्सा क्यों आता है और उस पर क़ाबू कैसे पाया जाए ?

जब तुम में से किसी को गुस्सा आए तो वुज़ू कर ले

जब तुम में से किसी को गुस्सा आए तो वुज़ू कर ले

यदि विचार किया जाय तो क्रोध के तीन मूल कारण होते हैं.

पहला कारणः आदमी कभी कभी घमंड की वजह से गुस्सा करता है, जब उसके अंदर “मैं” की भावना पैदा होती है, अपने सामने किसी की परवाह नहीं करता ऐसा व्यक्ति जब भी उसके स्वभाव के खिलाफ कोई काम होता है तुरन्त आपे से बाहर होने लगता है. ऐसे आदमी का इलाज यह है कि विनम्रता का मामला करे और अपने नफ्स को मामूली समझे. वह यह सोचे कि जिसको वह तुच्छ समझ रहा है, वह भी उसी के जैसे एक इनसान है, मुस्नद अह्मद की रिवायत है एक दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने हाथ पर थूका और उसे उंगली पर लेकर अपने साथियों को दिखाया और कहाः अल्लाह कहता हैः

أ یعجزنی ابن آدم وقد خلقتہ من مثل ھذہ ۔ مسنداحمد17387

“कया आदम की संतान मुझे थका सकती है जब कि मैं ने उसे इसी जैसी चीज से पैदा किया है”. (मुस्नद अह्मद 17387)

गुस्सा आने का दूसरा कारण बह्स तकरार और “तो तो में में” करना है, आदमी “तो तो में में” करते करते गुस्से में आ जाता है। इसी लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा किः

  أنا زعیم ببیت فی ربض الجنة لمن ترک المراء وإن کان محقا – سنن أبی داؤد 4800

“मैं उस व्यक्ति के लिए जन्नत में एक घर की गारंटी लेता हूं जिस ने बहस तकरार को छोड़ दिया यधपि वह हक़ पर हो “. और तीसरी चीज़ जो क्रोध का कारण बनती है वह है मनोरंजन. अत्यधिक हंसी मज़ाक़ भी गुस्सा का कारण बनता है और इसका इलाज यह है कि आदमी व्यस्त जीवन बिताए।

 

 गुस्सा पर क़ाबू कैसे पाएँ:

अब हमारे सामने यह सवाल उठता है कि वह कौन से ऐसे संसाधन हैं जिनको अपना कर हम अपने गुस्से को काबू में रख सकते हैं, और अपने नफ्स पर नियंत्रण रखने में हमारे सहयोगी बन सकते हैं तो इस संबंध में शरीअत ने हमारी भरपूर रहनुमाई कर दी है,  जैसे

(1) अल्लाह से शैतान मरदूद की शरण मांगें:

  सही बुखारी में हज़रत सुलैमान बिन सर्द बयान करते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ बैठा हुआ था, एक आदमी आपस में गालम गलोच कर रहा था,  उसका चेहरा लाल हो रहा था, उसके जबड़े फूल रहे थे, आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः “मैं ऐसा शब्द जानता हूं कि अगर वह कह ले तो उसका गुस्सा समाप्त हो जाए, अगर वह अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम कह ले तो उसका गुस्सा जाता रहे.” लोगों ने उस से कहाः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम कहते हैं कि अल्लाह से शैतान रजीम की शरण माँगो, उसने कहा: क्या मैं पागल हो गया हूं। (सहीह बुखारी 3108)

जब एक व्यक्ति इस्तिआज़ा के अर्थ पर विचार कर के अल्लाह से शरण मांगेगा, उस से सम्पर्क करेगा और गुस्सा को पीने के सवाब को मन और मस्तिष्क में बैठाएगा,और यह बात ध्यान में रखेगा कि जितना उसे ताक़त हासिल है उससे कहीं अधिक अल्लाह उस पर कुदरत सकता है तो अनिवार्य रूप से उसका गुस्सा ठंडा पड़ जाए जाएगा।

 (2) वुज़ू कर लें:

हज़रत अतिय्या बिन उरवा अस्सादी से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः

  إن الغضب من الشیطان وإن الشیطان خلق من النار وإنما تطفأ النار بالماء فإذا غضب أحدکم فلیتوضأ ۔ رواه أحمد 4/226 وأبو داؤد (4784

  “वास्तव में गुस्सा शैतान की ओर से है और शैतान की पैदाईश आग से हुई है और आग पानी से बुझ जाया करता है तो जब तुम में से किसी को गुस्सा आए तो वुज़ू कर ले “. (  अहमद 4/226 अबू दाऊद 4784)

 

 (3) खड़े हों तो बैठ जाएं और बैठे हों तो लेट जाएं:

मुस्नद अहमद, सुनन अबी दाऊद और सुनन इब्ने हिब्बान में हज़रत अबू ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः

اذا غضب أحدکم وھو قائم فلیجلس فإن ذھب عنہ الغضب وإلا فلیضطجع   رواه أحمد 5/152 وأبو داود(4782) وصححه ابن حبان (5688 .

 ” जब तुम में से किसी को गुस्सा आय और वह खड़ा हो तो बैठ जाए और बैठा हो तो लेट जाए ” )अहमद 5/152 अबू दाऊद (4782) और इब्ने हिब्बान ने इसे सही कहा है 5688)

(4)  गुस्सा को पी जाएं और उसके पीछे न गलें:

  अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः

لیس الشدید بالصرعة ولکن الشدید من یملک نفسہ عند الغضب – بخاری 6114 ، مسلم 2609

“पहलवान वह है जो पचखाड़दे बल्कि पहलवान वह है जो क्रोध के समय अपने नफ्स पर काबू रखे”.(बुखारी 6114, मुस्लिम 2609)  

और एक हदीस में गुस्से को काबू में करने का यह महत्व बयान किया गया किः

من کظم غیظا وھو قادر علی أن نیفذہ دعاہ اللہ علی رؤوس الخلائق حتی یخیرہ من الحورالعین ما شاء – صحیح الجامع: 6522

“जिसने ताकत रखने के बावजूद गुस्से को पी लिया, तो अल्लाह कल क़यामत के दिन उसे सारी प्राणियों के सामने बुलाएगा और और उसे अधिकार देगा कि जन्नत की हूरों में से जिसे चाहे चयन कर ले “.(सहीहुल जामिअ 6522)

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