कुरआन क्या है ?

हम अपने दोष को कैसे पहचानें ?

controlअपनी कमियों की परख कैसे करें ? वे कौन से ऐसे मापदंड हैं जिनकी रोशनी में हम अपने दोष को जान सकते हैं  ? इस संबंध में कुछ सुझाव  प्रस्तुत है:

 पहला तरीकाः

यह है कि हम अल्लाह वालों की जीवनी का अध्ययन करें और उन से अपने आप की तुलना करें, उसी प्रकार अच्छे चरित्र के लोग जिन से आप का मामला पेश आता है उनके चरित्र पर भी विचार करें स्वतः अपने नफ्स के दोष ज़ाहिर जाएंगे।

 दूसरा तरीक़ाः

दूसरों से अनुरोध करें कि वह आपके दोष बताएं: उसी तरह किसी ईमानदार और नेक दोस्त से आग्रह करें कि वह आपके अंदर पाए जाने वाले दोषों की पहचान कर के आप का सही दिशा में मार्गदर्शन करे।

सच्चाई यह है कि कितने ऐसे नकारात्मक तत्व एक इंसान के अंदर पाए जाते हैं जिनकी उसे पहचान नहीं होती जबकि यही कमियां उसके दोस्तों और मित्रों की निगाह में उजागर होती हैं, याद रखें कि ईमानदार दोस्त वही है जो आपकी कमियाँ आपसे बता दे और ऐसे लोगों से दूर रहें जो पक्षपात से काम लेते हों और आपके दोषों को छुपाते हों। हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु कहा करते थे

رحم اللہ امرأ أھدی الی عیوبی

अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे जो मुझे मेरे दोष का उपहार पैश करे। अर्थात् मुझे मेरे दोषों से अवगत करा दे।

 एक बार आपने हज़रत सलमान फारसी रज़ियल्लाहु अन्हु से पूछा: क्या हमारे बारे में तुम्हें कोई ऐसी बात पहुंची है जिसे आप नापसंद करते हों? तो सलमान फारसी रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा कि हमें पता चला है कि आपने एक दस्तरख़ान पर दो प्रकार का सालन इस्तेमाल किया है।

 उसी तरह उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु हज़रत हुज़ैफा रज़ियल्लाहु अन्हु ( जिन्हें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुनाफ़िक़ों के सम्बन्ध में रहस्य बताया था) से पूछा करते थे कि क्या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें भी मुनाफिकीन की श्रेणी में गिनाया है?

 इतिहास में एक नाम दाऊद अत्ताई का भी आता है जो अकेले रहने लगे थे, लोगों ने जब पूछा कि आप लोगों के साथ घुल मिलकर क्यों नहीं रहते? आपने कहाः

وماذا أضع بأقوام یُخفون عنی عیوبی؟ 

 उन लोगों के साथ उठने बैठने से क्या फायदा जो दोष हम से छिपाते हैं।

 तीसरा तरीक़ाः

अपने दुश्मनों की निंदा पर निगाह रखें: आम तौर पर आपके दुश्मन आपके कमजोर पहलू को ज़ाहिर करना चाहेंगे। इस लिए कमजोर पहलू को अपने लिए नसीहत समझें और अपने अंदर से उसे दूर कर लें क्योंकि दुर-अंदेश वही है जो जलने वालों के ईर्ष्या से लाभ उठाता है और मुंह पर झूठी तारीफ करने वालों से भी सावधान रहता है।

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