कुरआन क्या है ?

सोने और जागने के शिष्टाचार

125060hayahनींद अल्लाह के उपकारों में से एक महान उपकार और उसके वजूद की निशानियों में से एक निशानी है। अल्लाह ने फरमायाः

وَمِنْ آيَاتِهِ مَنَامُكُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَابْتِغَاؤُكُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ   الروم: 23

और उसकी निशानियों में से तुम्हारा रात और दिन का सोना और तुम्हारा उसके अनुग्रह की तलाश करना भी है। निश्चय ही इसमें निशानियाँ है उन लोगों के लिए जो सुनते है (सूरःअल-रूम 23) 

एक मुसलमान अपनी नींद को अल्लाह की इबादत और आज्ञाकारी का माध्यम बना सके और उस से लाभ उठा सके इस के लिए उचित है कि वह हदीसों में सोने के जो शिष्टाचार बयान किए गए हैं उनको सामने रखें जिन्हें हम संक्षिप्त में बयान कर रहे हैं

 (1) सवेरे सोना चाहिएः एक मुस्लिम रात में सवेरे सोता है, और ईशा की नमाज़ के बाद बिना आवश्यकता जगा नहीं रहता, इस लिए कि एक मुसलमान की सुबह फजर से पहले होती है, सुबह सोयेगा तो फजर की नमाज़ के लिए आसानी के साथ जाग सकेगा और उसका दिन चुस्ती और सक्रियता से आरम्भ होगा। देर रात तक जागने और दिन में निंद पूरी करने से बचना चाहिए। अल्लाह तआला ने रात को आराम और सुकून के लिए और दिन को कामकाज के लिए पैदा फरमाया है।

(2) सोने से पहले वुज़ू कर लेना चाहिएः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः “ जब तुम अपने बिस्तर पर आओ वुज़ू कर लो जैसे नमाज़ के लिए वुज़ू करते हो।” (बुख़ारी, मुस्लिम)

(3) पवित्र स्थान पर सोना चाहिए, एक मुस्लिम अपने बिस्तर को साफ सुथड़ा रखने की हमेशा कोशिश करता है, अपने बिस्तर पर बैठ कर खाता पिता नहीं बल्कि उसकी सफ़ाई का विशेष ख्याल रखता है।

(4) ऐसे स्थान पर सोना चाहिए जहां किसी प्रकार के खतरा का भय न हो, इसी लिए ऐसी छत पर सोने से मना किया गया है जिसके चारों ओर दीवार न हो कि सम्भव है कि सोने की स्थिति में उस से गिर पड़े। अल्लाह के रसूल सल्ल. ने फरमायाः “  जो व्यक्ति ऐसी छत पर सोया जिस पर दीवार नहीं है तो इसकी किसी के सर ज़िम्मेदारी नहीं ” (अबू दाऊद)

(5) सोते समय की दुआ पढ़नी चाहिएः सोते समय अल्लाह के सरूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से विभन्न दुआयें वर्णित हैं जिनका सोते समय एक मुस्लिम को एहतमाम करना चाहिए।

  • रसूल सल्ल0 जब बिस्तर पर जाते तो दोनों हाथ दुआ मांगने की तरह मिलाते और सूरः इख़लास, सूरः फलक़ और सूरः अन्नास पढ़ कर उसमें दम फरमाते और फिर जहाँ तक हाथ पहुंचता अपने शरीर पर फेर लेते। और जब सोने लगते तो अपना हाथ पवित्र गाल के नीचे रखते और यह दुआ करतेः अल्लाहुम्म बि इस्मिक अमूतु व अहया। (बुख़ारी)  “ऐ अल्लाह मैं तेरे ही नाम के साथ मरना चाहता हूं और तेरे ही नाम के साथ जीना चाहते हूं।

  • उसी प्रकार 33 बार सुब्हानल्लाह 33 बार अलहमदुलिल्लाह 34 बार अल्लाहु अकबर कहना चाहिए। (बुख़ारी)

  • आयतुल कुर्सी और सूरः बक़रा की अन्तिम दो आयतें भी पढ़ना चाहिए।

(6) अपने दायें पहलू सोना चाहिएः एक मुस्लिम अपने दायें पहलू सोता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति दायें पहलू पर सोने के बाद बायें पहलू पर सो जाता है तो उसके बाद कोई हरज की बात नहीं है।

(7) सोने से पहले अपने नफ्स का जाइज़ा लेना चाहिएः एक मुस्लिम जानता है कि नींद छोटी मृत्यु है सम्भव है कि इस से उठने का उसे अवसर न मिल सके, इस लिए सोते समय वह अपने दिन भर के कामों का जाइज़ा लेता है यदि अच्छे रहे तो अल्लाह की प्रशंसा बयान करता है और अधिक का संकल्प करता है और यदि कोई बुरा काम हो गया तो सोने से पहले अल्लाह से क्षमा मांग लेता और पश्चाताप कर लेता है। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़रमायाः अपने नफ़स का परीक्षा लो इस से पहले कि तुम से परीक्षा लिया जाये और अपने कर्मों को तौलो इस से पहले कि तुम्हें तौला जाए।

(8) सवप्न के आदाब का ख्याल करें :  यदि स्वप्न अच्छा हो तो उसे अपने लिए शुभसूचना समझें और उसे अपने भाइयों से बताना चाहिए और यदि सवप्न बुरा हो तो 1. उसे किसी से मत बतायें 2. अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम कहें 3. कर्वट बदल लें 4. बायें ओर तीन बार थूकें 5. वुज़ू कर के नमाज़ पढ़ सकते हों तो दो रकअत नमाज़ पढें।

(9) रात में जग कर  नमाज़ पढ़ने की आदत डालें : एक मुस्लिम रात की नमाज़ और तहज्जुद का इच्छुक होता है, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः

أفضل الصلاة بعد الفريضة صلاة الليل  رواه مسلم

अनिवार्य नमाज़ के बाद सब से श्रेष्ठ नमाज़ रात की नमाज़ है।

    (10) फ़जर की नमाज़ के लिए जागने का संकल्प करें : एक मुस्लिम जब सोने लगता है तो उसकी नीयत होती है कि वह फ़जर की नमाज़ के लिए जगेगा, इस प्रकार उसे चाहिए कि वह पूरे संकल्प और पूरी तैयारी के साथ सोये ताकि फ़जर की नमाज़ अपने समय पर अदा कर सके।

(11) जब नींद से उठें तो यह दुआ करें :

الحمد لله الذي أحيانا بعدما أماتنا وإليه النشور

अल-हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बादमा अमातना व इलैहिन्नुशूर। “ प्रत्येक प्रकार की प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है जिसने हमें एक प्रकार की मृत्यु देने के पश्चाच जीवित किया है और मरने के बाद उसी की ओर उठना है।

(12) सोने में संतुलन का ख्याल रखें : एक मुसलमान की पहचान है कि वह जीवन के हर काम में संतुलन अपनाता है, इस प्रकार उसे चाहिए कि बहुत देर तक न सोये, सोने के लिए आठ घंटे बहुत हैं, क्योंकि ज्यादा सोने से आलस्य और सुस्ती पैदा होती है।

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