कुरआन क्या है ?

भविष्य का ज्ञान केवल अल्लाह तआला को ही है।

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यह इस्लाम धर्म की महत्वपूर्ण मूल बातों में से है कि अल्लाह तआला ने भविष्य का ज्ञान अपने पास सुरक्षित रखा है। केवल तन्हा अल्लाह के पास प्रत्येक प्रकार का ज्ञान है। चाहे वह ज्ञान भूतकाल से संबंधित हो या वर्तमान काल से संबंधित हो या भविष्य काल से संबंधित हो। जो उपस्थित और अनुपस्थित वस्तुओं की पूर्ण जानकारी रखता है और अपने दासों , भक्तों और संदेष्टाओं को कुछ ज्ञान अपनी इच्छा से वह्यी के माध्यम से प्रदान करता है। जैसा कि अल्लाह ने पवित्र क़ुरआन में ज्ञान दिया है।

” قُل لَّا يَعْلَمُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ الْغَيْبَ إِلَّا اللَّهُ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ ” – النمل:65

अल्लाह का फरमान हैः ” इन्से कहो, अल्लाह के सिवा आसमानों और ज़मीन में कोई ग़ैब (परोक्ष) का ज्ञान नहीं रखता और वे (तुम्हारे पूज्य तो यह भी ) नहीं जानते कि कब वे उठाए जाएँगे।”” (सूरः अन-नमलः 65)

وقال تعالى “وَعِندَهُ مَفَاتِحُ الْغَيْبِ لاَ يَعْلَمُهَا إِلاَّ هُوَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ وَمَا تَسْقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلاَّ يَعْلَمُهَا وَلاَ حَبَّةٍ فِي ظُلُمَاتِ الأَرْضِ وَلاَ رَطْبٍ وَلاَ يَابِسٍ إِلاَّ فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ ” [ الأنعام: 59 ]

अल्लाह का फरमान है, ” उसी के पास गैब (परोक्ष) की कुँजियाँ है जिन्हें उसके सिवा कोई नहीं जानता, जल और थल में जो कुछ है, सब से वह परिचित है। पेड़ से गिरने वाला कोई पत्ता ऐसा नहीं जिसका उसे ज्ञान न हो। जमीन के अँधकारमय परदों में कोई दाना ऐसा नहीं जिस से वह परिचित न हो, सूखा और गीला सब कुछ एक खुली किताब में लिखा है।” (सूरः अल-अन्आमः 59)

संसार में होने वाली घटनाओं के बारे में मानव को कुछ भी जानकारी नहीं होती अगर्चे कि कुछ वस्तुओं में दावा करता है परन्तु वह ज्ञान भी प्रत्येक दिशा से सही नहीं होता। इसी लिए अल्लाह ने इस के प्रति भी सूचित किया है। अल्लाह का फरमान है।

” إِنَّ اللَّهَ عِندَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَّاذَا تَكْسِبُ غَداً وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ” – لقمان: 34

अल्लाह का फरमान हैः ” क़ियामत के दिन का ज्ञान केवल अल्लाह के पास है, वही वर्षा करता है, वही जानता है कि माओं के पेटों में क्या पल रहा है, कोई प्रणी नहीं जानता कि कल वह क्या कमाई करने वाला है और न किसी व्यक्ति को यह खबर है कि किस भूभाग में उसको मौत आनी है, अल्लाह ही सब कुछ जाननेवाला और खबर रखनेवाला है।”” (सूरः लुक़मानः 34)

अल्लाह तआला के भक्तों में फरिश्ते सब से निकटतम हैं और अल्लाह के आदेशों को ब्रह्माण्ड में लागू करते हैं, बहुत शक्तिशाली बन्दे हैं, उन्की संख्याँ बहुत ज़्यादा हैं, वह अल्लाह के आदेशों का पूर्ण अनुपालण करते हैं। वह कभी भी अल्लाह के आदेशों की अवहेलना नहीं करते, अल्लाह तआला ने उनके प्रति कहा है।

” يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا قُوا أَنفُسَكُمْ وَأَهْلِيكُمْ نَاراً وَقُودُهَا النَّاسُ وَالْحِجَارَةُ عَلَيْهَا مَلَائِكَةٌ غِلَاظٌ شِدَادٌ لَا يَعْصُونَ اللَّهَ مَا أَمَرَهُمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ ” –  التحريم: 6

अल्लाह का फरमान है, ” ऐ ईमानवालों, अपने आप को और अपने घर वालों को उस आग से बचाओ जिसका ईंधन इनसान और पत्थर होंगे, जिस पर कठोर स्वभाव के सख्त पकड़ करने वाले फरिश्ते नियुक्त होंगे जो कभी अल्लाह के आदेश की अवहेलना नहीं करते और जो आदेश उन्हें दिया जाता है, उसका पालन करते हैं। ” (सूरः अत-तह्रीमः 6)

परन्तु उन्हें भी अल्लाह ने भविष्य का ज्ञान नहीं दिया है, क्योंकि अल्लाह तआला ने गैब  (परोक्ष) की जानकारी स्वयं अपने पास सुरक्षित कर रखा है जैसा कि अल्लाह तआला ने पवित्र क़ुरआन में फरमाया है।

 قال الله تعالى ” عَالِمُ الْغَيْبِ فَلَا يُظْهِرُ عَلَى غَيْبِهِ أَحَداً * إِلَّا مَنِ ارْتَضَى مِن رَّسُولٍ فَإِنَّهُ يَسْلُكُ مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ رَصَداً ” –  الجن: 27

अल्लाह का फरमान है, ” वह परोक्ष का जाननेवाला है, अपने परोक्ष को किसी पर प्रकट नहीं करता , सिवाए उस रसूल के जिसे उसने (परोक्ष का ज्ञान देने के लिए) पसन्द कर लिया हो, तो उसके आगे और पीछे वह रक्षक लगा देता है।” (सूरः जिन्नः 27,28)

अल्लाह ताआला के प्रियतम भक्त नबी और रसूल होते हैं। जब तक वह जिवित रहते हैं अल्लाह उन्हें वह्यी के माध्यम से गैब और भविष्य के बहुत से ज्ञान प्रदान करता रहता है। परन्तु उनकी मृत्यु के बाद वह्यी का सिलसिला बन्द हो जाता है। चुनांचे नूह (अलैहिस्सलाम) कहते हैं।,

 ” وَلاَ أَقُولُ لَكُمْ عِندِي خَزَآئِنُ اللّهِ وَلاَ أَعْلَمُ الْغَيْبَ وَلاَ أَقُولُ إِنِّي مَلَكٌ وَلاَ أَقُولُ لِلَّذِينَ تَزْدَرِي أَعْيُنُكُمْ لَن يُؤْتِيَهُمُ اللّهُ خَيْراً اللّهُ أَعْلَمُ بِمَا فِي أَنفُسِهِمْ إِنِّي إِذاً لَّمِنَ الظَّالِمِينَ ” – هود: 31

जैसा कि अल्लाह तआला ने नूह (अलैहिस्सनाम) के किस्से को इस प्रकार बयान फरमाया है, ” और मैं तुम से नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के खज़ाने हैं, न यह कहता हूँ कि मैं परोक्ष (ग़ैब) का ज्ञान रखता हूँ, न यह मेरा दावा है कि मैं फरिश्ता हूँ और यह भी मैं नहीं कह सकता कि जिन लोगों को तुम्हारी आँखे उपेक्षा (नफरत) से देखती है , उन्हें अल्लाह ने कोई भलाई नहीं दी। उनके जी का हाल अल्लाह ही खूब जानता है अगर मैं ऐसा कहूँ तो अत्याचारिक हूँगा।”” (सूरः हूदः 31)

अल्लाह के नबियों और रसूलों में सब से प्रतिष्ठित और उत्तम नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी अपने से परोक्ष और भविष्य के ज्ञान का इनकार किया है। जैसा कि अल्लाह का कथन है।

 ”  قُل لاَّ أَمْلِكُ لِنَفْسِي نَفْعاً وَلاَ ضَرّاً إِلاَّ مَا شَاء اللّهُ وَلَوْ كُنتُ أَعْلَمُ الْغَيْبَ لاَسْتَكْثَرْتُ مِنَ الْخَيْرِ وَمَا مَسَّنِيَ السُّوءُ إِنْ أَنَاْ إِلاَّ نَذِيرٌ وَبَشِيرٌ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ” – الأعراف: 188

अल्लाह का फरमान है, ” ऐ नबी, उन्से कहो कि “ मुझे अपने आपके लिए किसी लाभ और हानि का अधिकार प्राप्त नहीं, अल्लाह ही जो कुछ चाहता है वह होता है और अगर मुझे परोक्ष (गैब) का ज्ञान होता तो मैं बहुत से लाभ अपने लिए प्रप्त कर लेता और मुझे कभी कोई हानि न पहुँचती। मैं तो सिर्फ एक सचेतकर्ता और खुशखबरी सुनानेवाला हूँ उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं। ” (सूरः अल-आराफः 188)

नबियों के बाद अल्लाह ने सब से उच्चतम स्थान नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथियों सहाबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) को दिया है। धर्म के रास्ते में इन नेक और निःस्वार्थ व्यक्तियों ने अपना सब कुछ बलिदान कर दिया जिस कारण अल्लाह ने उन्हें दुनिया में सफलता दिया और आखिरत में भी सफलता की गारेंटी दी है और सहाबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) सब वल्यों के वलीउल्लाह हैं परन्तु अल्लाह तआला ने उन्हें भी भविष्य और परोक्ष का ज्ञान नहीं दिया है। जैसा कि अल्लाह तआला ने इस वास्तविक्ता की स्पष्ठी करण किया है।

 مَّا كَانَ اللّهُ لِيَذَرَ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى مَا أَنتُمْ عَلَيْهِ حَتَّىَ يَمِيزَ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَمَا كَانَ اللّهُ لِيُطْلِعَكُمْ عَلَى الْغَيْبِ وَلَكِنَّ اللّهَ يَجْتَبِي مِن رُّسُلِهِ مَن يَشَاءُ فَآمِنُواْ بِاللّهِ وَرُسُلِهِ وَإِن تُؤْمِنُواْ وَتَتَّقُواْ فَلَكُمْ أَجْرٌ عَظِيمٌ – آل عمران: 179

अल्लाह का फरमान है, ” अल्लाह ईमानवालों को इस दिशा में हरगिज़ न रहने देगा जिस में तुम लोग इस समय पाए जाते हो, वह पाक लोगों को नापाक लोगों से अलग करके रहेगा, किन्तु अल्लाह का तरीक़ा यह नहीं है कि तुम लोगों पर परोक्ष (ग़ैब) को प्रकट कर दे। (परोक्ष की बातें बताने के लिए तो) अल्लाह अपने रसूलों में से जिसे चाहता है चुन लेता है। अतः (परोक्ष की बातों के बारे में) अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखो, यदि तुम परहेज़गारी की नीति अपनाओगे तो तुम्को बड़ा प्रतिदान मिलेगा।” (सूरः आले-इमरानः 179)

अल्लाह तआला के शक्तिशाली और बुद्धिवाले मख्लूकों में से एक मख्लूक जिन्न है,  जिन की सृष्ठा अल्लाह ने मानव से पूर्व किया था, जो फरिश्तों के साथ अल्लाह की इबादत और उपासना में ब्यस्त रहते थे। परन्तु अल्लाह की अवज्ञाकारी के कारण अल्लाह ने उसे अपने पास से धुत्कार दिया। उन में से कुछ मुस्लिम होते हैं और कुछ गैर मुस्लिम जैसा कि अल्लाह तआला ने सूरः जिन्न में बयान फरमाया है, वह लोग भी गैब (परोक्ष) का ज्ञान नहीं रखते जैसा कि अल्लाह ने सुलैमान (अलैहिस्सलाम) को वह बादशाहत दी जो किसी भी मानव को प्राप्त नहीं हुआ है और भविष्य में प्राप्त भी नहीं होगा, वह जिन्नों पर शासन करते थे, उनके प्रति अल्लाह ने पवित्र कुरआन में फरमाया है।

 فَلَمَّا قَضَيْنَا عَلَيْهِ الْمَوْتَ مَا دَلَّهُمْ عَلَى مَوْتِهِ إِلَّا دَابَّةُ الْأَرْضِ تَأْكُلُ مِنسَأَتَهُ فَلَمَّا خَرَّ تَبَيَّنَتِ الْجِنُّ أَن لَّوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ الْغَيْبَ مَا لَبِثُوا فِي الْعَذَابِ الْمُهِينِ ” – سبأ: 14

“ “ फिर जब सुलैमान पर हमने मौत का फैसला लागू किया तो जिन्न को उसकी मौत का पता देने वाली कोई चीज़ उस घुन के सिवा न थी जो उसकी लाठी को खा रहा था। इस तरह जब सुलैमान गिर पड़े तो जिन्नों पर यह बात खुल गई। अगर वे गैब (परोक्ष) के जानने वाले होते तो इस अपमान जनक अज़ाब में ग्रस्त न रहते। “ (सूरः सबाः 14)

अल्लाह तआला की इस आयत से स्पष्ठ होआ कि जिन्न भी गैब (परोक्ष) का ज्ञान नहीं रखते हैं परन्तु कुछ जिन्न चोरी से अल्लाह के आदेशों को सुनने की कोशीश करते हैं जब अल्लाह तआला फरिश्तों को आदेश देता है, परन्तु अल्लाह के आदेशों को सुनते समय उनपर प्रदीप्त अग्निशिखा से आक्रमन होता है तो कुछ तो उन आदेशों को अपने से निचे वाले को बता देते हैं और कुछ नही बता पाते और अपने जादूगरों, पूजारियों को कुछ खबर बता देते हैं जिस में बहुत से झूट मिला कर वह लोग जनता को मूर्ख बनाते हैं। कुरआन ने कुछ इस प्रकार बयान किया है।

 إِلاَّ مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُّبِينٌ ” –  الحجر:16-18

” यह हमारी कार्य-कुशलता है कि आसमान में हमने बहुत से सुरक्षित क्षेत्र बनाए, उनको देखन् वालों के लिए तारों से सुसज्जित किया, और हर फिटकारे हुए शैतान से उनको सुरक्षित कर दिया– कोई शैतान उनमें राह नहीं पा सकता ,यह और बात है कि कुछ सुन-गुन ले ले और जब वह सुन-गुन लेने की कोशीश करता है तो एक प्रदीप्त अग्निशिखा उसका पीछा करती है।” (सूरः अल-हिज्रः 16-18)

इस कुरआनी आयत की स्पष्ठी करण सही हदीस में बहुत ही उत्तम ढंग से हुई है।

إذا قضى الله الأمر في السماء، ضربت الملائكة بأجنحتها خضعانا لقوله، كأنه سلسلة على صفوان، فإذا فزع عن قلوبهم قالوا: ماذا قال ربكم؟ قالوا للذي قال: الحق ، وهو العلي الكبير، فيسمعها مسترق السمع، ومسترق السمع هكذا بعضه فوق بعض- ووصف سفيان بكفه فحرفها، وبدد بين أصابعه- فيسمع الكلمة فيلقيها إلى من تحته، ثم يلقيها الآخر إلى من تحته، حتى يلقيها على لسان الساحر أو الكاهن، فربما أدرك الشهاب قبل أن يلقيها، وربما ألقاها قبل أن يدركه ، فيكذب معها مائة كذبة، فيقال: أليس قد قال لنا: يوم كذا وكذا، كذا وكذا، فيصدق بتلك الكلمة التي سمع من السماء

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः   ” जब अल्लाह आकाश में किसी चीज़ का आदेश देता है तो फरिश्ते अल्लाह के आदेश के आगे झुक जाते हैं। गोया कि चिकने पत्थर पर श्रृंखला की तरह हैं। जब उनके हृदय से भय समाप्त होता है तो एक दुसरे से प्रश्न करते हैं कि हमरे रब ने क्या कहा है ? तो वह उत्तर देते हैं, हमारे रब ने सत्य कहा है और उसका प्रत्येक आदेश सत्य ही होता है और वह बहुत ही महान से महानतम है। तो चोरी से सुनने वाले कुछ सुन लेते है और चोरी से सुनने वाले एक दुसरे पर इस प्रकार होते हैं। (सुफयान ने अपने हथैली को हिला कर और अपने उंगलियाँ उपर निचे कर के बताया) तो वह जो कुछ सुनते हैं उसे अपने से निचे वाले को बता देता है फिर वह अपने से निचे वाले को सुना देता है। यहाँ तक कि जादूगरों और हाथ देखनेवाले बाबाओं को बता देते हैं। तो कभी तो प्रदीप्त अग्निशिखा उनको बताने से पहले जला देती हैं और कभी बताने के बाद जला देती हैं। तो यह जादूगर उस में सौ झुट मिला कर लोगो को बताते हैं। तो कहा जाता है कि हमें फलाँ बाबा ने ऐसा ऐसा कहा था, फलाँ जादूगर ने ऐसा ऐसा कहा था और ऐसा ही हुआ और आकाश से सुना हुई बात के कारण उसे सच माना जाता है।” (सही बुखारः 4800)

अल्लाह तआला ने गैब (परोक्ष) का ज्ञान अपने पास सुरक्षित रखा है। जब जिस प्रकार का ज्ञान अपने बन्दों में से नबियों और रसूलों को कुछ ज्ञान वह्यी के माध्यम से प्रदान करता है और उन रसूलों और नबी के देहांत के बाद वह्यी का आना बन्द हो जाता है और किसी भी नबी और रसूल को पूर्ण गैब (परोक्ष) का ज्ञान नहीं होता था बल्कि उनका ज्ञान सिमित होता है। जैसा कि अल्लाह के बहुत से अन्बिया ने इस बात को माना है और अल्लाह तआला ने भी नबी रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को संबोधित करते हुए फरमायाः  ” यह ख़बर ग़ैब की ख़बरों में से है जिनकी वह्यी (प्रकाशना ) हम आप की तरफ करते हैं, इन्हें इस से पहले न आप जानते थे और न आप की क़ौम, इस लिए आप सब्र करें, यक़ीन कीजिये कि नतीजा परहेज़गारों के लिए ही है।” –  सूरः हूदः 49

जो व्यक्ति भी भविष्य के ज्ञान का दावा करता है। गोया कि उसने अपने ज्ञान को अल्लाह के ज्ञान के साथ मिलाता है। हाँला कि नबियों और रसूलों ने अपने से ग़ैब (परोक्ष) के ज्ञान का इन्कार किया है।

जबकि हमारे कुछ अपने आप को मुस्लिम कहने वाले भाई भी अज्ञानता के कारण ग़ैब के ज्ञान के प्रति सही रास्ते से भटके हुए हैं, तो उन्हें चाहिये कि अल्लाह के फरमानों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदर्शीय जीवनकथा पर गंभीरता से विचार करें, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की जीवन में प्रकटित घटनाओं पर ध्यान दें तो मालूम होता है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को भी अल्लाह तआला ने भविष्य का पूर्ण ज्ञान नहीं दिया था बल्कि बहुत सी चीज़ो का ज्ञान वह्यी (प्रकाशना) के माध्यम से पुर्व ही दे देता था और बहुत सी वस्तुओं में किसी घटना के घटित होने के बहुत बाद देता था और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) इस अविधि में बहुत परेशान भी होते थे।

عائشة رضي الله عنها قالت: وعد جبريل رسول الله صلى الله عليه وسلم في ساعة يأتيه ، فجاءت الساعة ولم يأت جبريل عليه السلام ، فإذا بجرو كلب تحت السرير ، فقال : متى دخل هذا الكلب ؟ قالت : ما علمت به ، فأمر به فأخرج ، وجاء جبريل عليه السلام ، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: واعدتني في ساعة فجلست لك فلم تأت ، قال : منعني الكلب الذي كان في بيتك ، إنا لا ندخل بيتا فيه كلب أو صورة. (حلية الأولياءرقم الصفحة :3/295) خلاصة حكم المحدث:صحيح

आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णन है कि कहती हैं कि जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को वचन दिया कि वह फलाँ घड़ी में आऐंगे और फिर वह नियुक्त समय पर नही आए, तो घर में चारपाई के निचे कुत्ते का बच्चा था तो रसूल रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया कि यह कब घर में प्रवेश हो गया तो आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने उत्तर दिया कि मैं नहीं जानती, तो आप के आदेशानुसार उसे घर से निकाला गया फिर जिब्रील (अलैहिस्सलाम) आए, तो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा कि आप ने फलाँ समय में आने का वादा किया था और में आप के प्रतिक्षा में था परन्तु आप नहीं आऐ, तो जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने उत्तर दिया। आप के घर में उपस्थित कुत्ते ने मुझे आने से रोके रखा। हम उस घर में दाखिल नहीं होते जिस घर में कुत्ता और फोटो होता है। (हिल्यतुल अवलियाः 295/3

इस हदीस पर ध्यान पूर्वक विचार करें तो मालूम होगा कि  रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को भी भविष्य का ज्ञान नहीं था, क्यों कि कुत्ता घर में था आप को मालूम न हो सका और आप ने अपनी पत्नी से प्रश्न किया कि कुत्ता कब घर में दाखिल हुवा, इसी प्रकार जिब्रील के न आने का कारण भी आप को मालूम न हो सका और आप जिब्रील के आने की प्रतिक्षा कर रहे थे और घर से कुत्ता के निकाले जाने के बाद जब जिब्रील (अलैहिस्सलाम) आए तो आप ने नियुक्त समय पर न आने का कारण पूंछा तो जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने  घर में न आने का कारण कुत्ता और फोटो बताया। गोया कि इस घटना में कई प्रकार से पता चला कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को भी परोक्ष का ज्ञान नहीं था।

सही बुखारी हदीस क्रमांकः 4141 तथा सही मुस्लिम हदीस क्रमांकः 2770 में बहुत ही विस्तार से आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पर बुह्तान का क़िस्सा बयान हुवा है। इस क़िस्से को संक्षेप में बयान करने का प्रयास करता हूँ।

रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब भी यात्रा के लिए निकलते थे तो अपने पत्नियों के बीच कोपन डालते और जिस पत्नी का नाम निकलता था वह आप के साथ जाती थी, इसी प्रकार एक युद्ध के अवसर पर कोपन में आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) का नाम निकला, युद्ध से वापसी पर एक स्थान पर योधा ने पराँव डाला तो आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) मानव अवश्यक्ता के लिए दूर गईं और वापसी में आते समय उनका गले का हार गुम हो गया। तो वे उसे तलाशने के लिए फिर से चली गईं और चूंकि आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पत्ली दुबिली कम्सिन थीं और हौदज रखने वालों ने समझा कि आप अपने हौदस में हैं, तो उन लोगों ने हौदज को ऊंट पर रखा और सब लोग वहाँ से निकल गये  जब आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) हार तलाश कर वापास आईं तो देखा कोई नहीं है, तो वे वहीं पर बैठ गईं  कि जब रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मुझे नहीं देखेंगे तो वापस आऐंगे, बैठने के कुछ देर बाद उनहें निंद आ गई। लश्कर के आखिर में सफवान बिन मुअत्तल अस्सलमी आते थे, जब उन्हों ने देखा कि कोई है तो करीब आए तो आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को पर्दा के आदेश उतरने से पहले देख चुके थे, पहचान लिया और ″ इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन ″  पढ़ा तो आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) जाग गईं और वह अपने ऊंट को बैठाया और आईशा(रज़ियल्लाहु अन्हा) ऊंट पर बैठ गईं । मदीने की ओर चल पड़े, जब मदीना पहुंचे तो मुनाफेक़ीन ने देखा कि आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) बाद में सफवान बिन मुअत्तल अस्सलमी के साथ आईं  हैं तो उन लोगों ने आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पर सफवान बिन मुअत्तल अस्सलमी के साथ अशुद्ध संबंध का इल्ज़ाम लगा दिया।  और इस बात का पूरे मदीने में प्रचार करने लगे, यह मामला एक महीने तक चला और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) इस अविधि में बहुत परेशान रहे, यहाँ तक कि सब लोगों से आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) और सफवान बिन मुअत्तल अस्सलमी के चरित्र के प्रति प्रश्न करने लगे और बड़े बड़े सहाबा से इस मस्ले में सलाह प्रामर्श करने लगे तो सब लोगों आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) और सफवान बिन मुअत्तल अस्सलमी के प्रति अच्छे आचरण की गवाही दी , फिर भी मुनाफेकीन के प्रचारण के कारण रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बहुत तक्लिफ पहुंची और मिम्बर पर चढ़ कर मुनाफिक़ो के सरदार अब्दुलालाह  बिन उबय अस्सुलूल के शड़यन्त्र का ज़िक्र किया। आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) यात्रा से वापस आकर बिमार हो गईं और आप को लोगों में चर्चित इल्ज़ाल का ज्ञान नहीं था जब पता चला तो  बहुत रोने लगी और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अनुमति ले कर अपने पिता के घर आगईं । रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बहुत परेशान हैं, कुछ समझ में नहीं आ रहा है तो अन्तिम में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के पास तश्रीफ लाए और कहा, ऐ आईशा यदि तुम से भूल हो गई तो इक़्रार कर लो, अल्लाह से क्षमा मांगो, अल्लाह बहुत दयालु और माफ करने वाला है। आईशा खामुश हो कर अपने पिता से कहा, मेरी ओर से उत्तर दीजिये, पिता ने कहा, मैं किया उत्तर दूँ , फिर माता से कहा, मेरी ओर से उत्तर दीजिये, माता ने कहा, मैं किया उत्तर दूँ , फिर स्वयं कहा, यदि में झूट बोलुंगी तो आप लोग सच मानेंगे और सच बोलुंगी, तो मुझे झूटा समझेंगे, मैं वही कहती हूँ जैसा कि याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने कहा था। मैं अल्लाह पर भरोसा करते हुए बेह्तरीन सब्र करती हूँ। यह कहना था कि कुछ क्षणों में रसूल  (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर वह्यी (प्राकाशना) उतरी जिस में अल्लाह तआला ने आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को इल्ज़ाम से पवित्र किया और मुनाफेक़ीन और उनका साथ देने वालों को झूठा क़रार दिया।

इस पूरे क़िस्से पर विचार करें तो बिल्कुल स्पष्ठ हो जाता है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) परोक्ष (ग़ैब) का ज्ञान नहीं रखते थे। यदि ग़ैब की जानकारी रखते तो फिर एक महीने तक परेशान नहीं होते, सहाबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) से दोनों के चरित्र के प्रति प्रश्न नहीं करते, आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के पास आकर उन से उकनी पवित्रता के प्रति प्रश्न नहीं करते। बल्कि जानते कि यह मुनाफेक़ीन की चाल है।

इस प्रकार की और बहुत सी घटना होई जिस में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बहुत परेशान थे, बाद में अल्लाह ने वह्यी के माध्यम आप को खबर दिया। यदि आप को भविष्य ज्ञान होता तो आप परेशान नहीं होते थे। उसे परेशानी से निकलने का रास्ता निकाल लेते। जिस से प्रातीत हआ कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को भी परोक्ष का ज्ञान नहीं था।

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