कुरआन क्या है ?

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एसे थे।

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   मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का जन्म दिन 9 रबीउल अव्वल आमुल फील का पहला वर्ष है जो कि ईसवी वर्ष के अनुसार 22 अप्रील 571 है। जैसा कि इतिहासिक विद्वानों ने प्रामाणित किया है। मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस्लाम के प्रचार में बहुत कष्ट उठाया। विरोधी लोगों ने आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को शारीरिक और मान्सिक टार्चर किया। परन्तु आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हर प्रकार की यातनाओं को झेलते हुए अच्छे आचार, शिक्षा, सदाचार तथा व्यवहार को फैलाते रहे। ईश्वर के संदेश और आज्ञा को लोगों तक पहुंचाते रहे और इस रास्ते में आने वाली परिशानियों पर सब्र करते रहे। यहां तक कि अल्लाह ने उन्हें अपने पास बुला लिया। मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) 23 वर्ष की कम अवधि में ही अल्लाह के संदेश को पुरे अरब द्विप में फैला दिया। एसे महापुरूष जो स्वयं भुके रहके दुसरों को खिलाते रहे। उन के जीवन कथा के अन्गिनित पहलु में कुच्छ बातें आप के साम्ने रखता हूँ और अल्लाह से प्रार्थाना करता हूँ कि अल्लाह हमें और आप को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के तरीके के अनुसार चलने की शक्ति प्रदान करे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मुलाकात के समय सब से पहले सलाम करते।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हर समय अल्लाह का नाम लिया करते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सब लोगों से अधिक दान शील थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सब लोगों से अधिक बहादुर थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसी स्थान पर बैठ जाते जहाँ जगह मिल जाती।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) झूट से घृणा करते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) दुनिया की सामग्री से अरूचि रखते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) चटाई पर सोते और थोड़ी वस्तु पर गुज़ारा करते और उनका तक्या खुजूर के रेशे से बनाया गया था।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) गरिबों के साथ उठा बैठा करते।
मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कुंवारी लड़की से अधिक लज्जा करते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कभी कोई चीज़ मांगी गई तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इन्कार नहीं किया।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जाहिल (मुर्ख) को क्षमा कर देते और पीड़ा पर सब्र करते ।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बात करने वालों की ओर पूरा ध्यान देते हुए मुस्कुराते और प्रेम से उसका हाथ पकड़े रहते यहाँ तक स्वयं वह छोड़ देता।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बात करने वालों की ओर पूरी तरह मोतवज्जा होते यहाँ तक कि वह समझता कि वह उनके पास सब से प्रिय है।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नापसन्द करते कि कोइ उस के लिए खड़ा हो, जैसा कि मना करते कि उनकी प्रशंसा में निश्चित सिमा को पार किया जाए।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी वस्तु को नापसन्द करते तो उन्के चेहरे से पता चल जाता।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सिवाए अल्लाह के पद में अपने हाथ से किसी को तक्लिफ न पहुंचाया ।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को वह कार्य (पुण्य) सब से अधिक प्रिय था जो निरंतरता से किया जाए यदि वह कम ही क्यों न हो।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) लोगों को हल्की नमाज पढ़ाते थे और स्वयं नमाज़ बहुत लम्बी पढ़ते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सोते समय अपने दांये हाथ को दांये गाल के निचे रखते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को जब भी शुभ खबर प्राप्त होती तो अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए सज्दा करते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी समुदाय से डरते तो अल्लाह से प्रार्थाना करते ” ऐ अल्लाह, हम तुझ ही को उन के मुकाबले में करते हैं और उनकी शड़यंत्र से तेरी शरण में आते हैं।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब प्रिय वस्तु देखते तो कहते थे, सम्पूर्ण प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जिस के दया से अच्छी चीज़ होती हैं और जब अप्रिय वस्तु देखते तो कहते, हर हाल में सम्पूर्ण प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है। 

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने लिए पहले दुआ करते फिर दुसरों के लिए दुआ करते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब फजर की दो रकअत सुन्नत पढ़ लेते तो दांये करवट थोड़ासा लेटते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब शव को दफना देते तो वहां खड़ा होते और कहते ” अपने भाइ के लिए प्रार्थाना करो कि अल्लाह उसे क्षमा कर दे और उसे सही उत्तर देने की शक्ति प्रदान करे, क्योंकि अभी उस से प्रश्न किया जाएगा”। (सही अल्जामिअः4760)

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सोते समय दातौन अपने माथे के नीचे ही रखते और जब भी आंख खुलती तो दातौन करते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कभी भी किसी वस्तु में नक्स न निकाला।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कभी भी किसी भोजन में नक्स न निकाला। यदि इच्छा हुइ तो खाते थे , नही तो छोड़ देते,

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी तीन उंगलियों से खाते और हाथ पोंछ्ने से पहले उसे चाट लेते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी शक्ति के अनुसार दांये ओर से आरम्भ करने को पसन्द करते थे। चाहे पवित्रता हो, या जूता – चप्पल पहनने में या अपने हर कार्य में,

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सुर्य के निकल्ने के कुछ समय के बाद चार रकअत नमाज़ पढ़ते और कभी जितना अल्लाह चाहे ज़्यादा पढ़ते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सोमवार और गुरूवार को रोज़ा रखने का खास खयाल करते थे।

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उत्तम, महान सद्व्यवहार के होते हुए भी अल्लाह से प्रार्थना करते थे कि अल्लाह उन्के सदाचार को अच्छा बनाऐ, और बुरे व्यवहार से अल्लाह की शरण लेते थे। मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर अन्गिनित दरूदु सलाम हो,

आइशा (रज़ी अल्लाहु अन्हा) वर्णन करती हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) दुआ करते थे ” ऐ अल्लाह तू ने मुझे रूपवान बनाया है उसी तरह मेरे व्यवहार को सुन्दर तथा अच्छा कर दे। (तुहफतुल- अहवज़ीः 402/5)

अबू हुरैरो (रज़ियल्लाहु अन्हु) वर्णन करते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) दुआ करते थे ” ऐ अल्लाह! मैं तेरे शरण में बुरे व्यवहार ,धर्म भ्रष्ट और असभ्य (बदबख्ती) से आता हूँ। (तरगीब वत्तरहीबः मुन्ज़रीः 360/3)

यही वह उत्तम शिक्षा और आदर्श जीवन कथा है जो हमारे लिए अनुकरणीय है और यही हमारे लिए मोक्षीय है और अल्लाह तआला ने हमें रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा पालन का आदेश दिया है।   

अल्लाह तआला का कथन है,” और जो लोग अल्लाह और रसूल के आज्ञा का पालन करेंगे वह उन लोगों के साथ होंगे जिन पर अल्लाह ने इनाम फरमाया है अर्थात नबी , सच्चे लोग, और शहीदों और अच्छे लोग , कैसे अच्छे हैं यह साथी जो किसी को प्राप्त हों “। (सूरःनिसाः70)  

अल्लाह तआला का कथन है,” वास्तव में तुम लोगों के लिए अल्लाह के रसूल में एक उत्तम आदर्श था प्रत्येक उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह और अन्तिम दिन की आशा रखता हो, और अल्लाह को ज़्यादा याद करे”। (सूरः अहज़ाबः 21)

तो वास्तविक मूमिन वह व्यक्ति है जो प्रिय रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पूर्ण रूप से जीवन के हर मोड़ पर अनुकरण करे और उनके सुन्नत पर हर तरह से अमल करे।

अल्लाह से दुआ करता हूँ कि हमें और आप को नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के तरीके के अनुसार अनुकरण की शक्ति प्रदान करे।    आमीन

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