कुरआन क्या है ?

छात्रा के पर्स में क्या है?

लेखः  जौदा अल-फ़ारिस

अनुवादः सफ़ात  तैमी

 

महिला पर्सअल्लाह तआला ने अपनी किताब क़ुरआन करीम में फरमायाः

  وَإِن تَعُدُّوا نِعْمَتَ اللَّـهِ لَا تُحْصُوهَا (سورة إبراهيم 34 )   

“अगर तुम अल्लाह की नेमतों की गणना करना चाहो तो नहीं कर सकते.” (सूरत इब्राहीम 34)

अल्लाह तआला ने हम पर अनगिनत उपकार की हैं, कर रहा है, और महा-प्रलय के दिन तक करता रहेगा, हम सर से पैर तक उसके उपकारों में डूबे हुए हैं, हमारी जिम्मेदारी मात्र यह है कि हम अल्लाह के आभारी बनें. क्योंकि उसका आदेश है:

وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِن شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ ۖ وَلَئِن كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٌ ﴿ سورة إبراهيم 7 ﴾

जब तुम्हारे रब ने सचेत कर दिया था कि ‘यदि तुम कृतज्ञ हुए तो मैं तुम्हें और अधिक दूँगा, परन्तु यदि तुम अकृतज्ञ सिद्ध हुए तो निश्चय ही मेरी यातना भी अत्यन्त कठोर है।” (सूरः इब्हीम 7) 

 इस लेख की वास्तविकता एक कहानी है जो ईमेल द्वारा मुझे प्राप्त हुई है, इस कहानी में सबक है, शिक्षण है और सलाह है।  सार्वजनिक लाभ हेतु हम यह कहानी आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं, तो लिजीए पढ़िये यह कहानी:

एक “महिला कॉलेज” में सरकारी जांच आई और कॉलेज के सारे क्लासों में घूम घूम कर लड़कियों के पर्स की तलाशी लेने लगी, हर एक लड़की के पर्स की जांच की गई, किसी भी पर्स में किताबें, कांपियों आवश्यक पन्नों के अतिरिक्त कोई निषिद्ध वस्तु पाई नहीं गई, लेकिन एक अंतिम वर्ग रह गया था, और यही घटनास्थल था।

जांच कमिटि हॉल में प्रवेश करती है और सारी लड़कियों से अनुरोध करती है कि जांच के लिए अपना पर्स खोल कर सामने रख दें, हाल के एक किनारे एक छात्रा बैठी थी, उसकी परेशानी बढ़ती जा रही थी, वह जांच कमिटि पर झिपटती निगाह डाल रही थी और लज्जा से पानी पानी हो रही थी. वह अपने पर्स पर हाथ रखी हुई थी! जांच शुरू हो चुकी है, उसकी बारी आने वाली है, लड़की की परेशानी बढ़ती जा रही है…. कुछ ही देर में जांच कमिटि लड़की के पर्स के पास पहुंच चुकी है, लड़की ने पर्स को ज़ोर से पकड़ लिया जैसे वह दबी ज़बान में कहना चाहती हो कि तुम लोग इसे कदापि नहीं खोल सकते, उसे कहा जा रहा है: पर्स खोलो! वह जांच कमिटि को देख रही है और उसकी ज़बान बंद है, पर्स को सीने से चिपका रखी है, जांच कमिटि ने फिर कहा: पर्स हमारे हवाले करो, लड़की ज़ोर से चिल्ला कर बोलती है: नहीं मैं नहीं कर सकती. पूरी जांच कमिटि इस लड़की के पास जमा हो चुकी है, सख्त चर्चा शुरू हो चुकी है. हॉल की सारी छात्रायें परेशान हैं, आख़िर भेद क्या है? वास्तविकता क्या है? अंततः लड़की से उसका पर्स छीन लिया गया, सारी लड़कियाँ चुप….आवाजें बंद….हर तरफ सन्नाटा छा गया है. पता नहीं क्या होगा….पर्स में कया चीज़ है?

जांच कमिटि छात्रा से पर्स लिए कॉलेज के कार्यालय में प्रवेश करती है, छात्रा कार्यालय में आई, उसकी आंखों से आंसू जारी है, सब की ओर क्रोध से देख रही थी कि लोगों की भीड़ के सामने उसे अपमान किया गया था, उसे बैठाया गया, कॉलेज निदेशिका ने अपने सामने पर्स खुलवाया, छात्रा ने पर्स खोला, हे अल्लाह! क्या था पर्स में….? क्या अनुमान कर सकते हैं आप….?

पर्स में कोई निषिद्ध वस्तु नहीं थी, न अश्लील फ़ोटोज़ अथवा विडियोंज़ थे,  अल्लाह की क़सम! ऐसी कोई चीज़ न थी…. हाँ! उस में रोटी के कुछ टुकड़े थे, और प्रयुक्त सैंडविच के कुछ बाकी भाग थे, बस यही थे और कुछ नहीं. जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा: सभी छात्रायें जब नाश्ता कर लेती हैं तो टूटी फूटी रोटी के टुकड़े जमा कर लेती हूँ जिसे स्वयं खाती हूँ और कुछ अपने परिवार के लिए लेकर जाती हूँ. हाँ! अपनी माँ और बहनों के लिए …. ताकि उन्हें दो-पहर और रात का खाना मिल सके. हम निर्धन हैं, हमारा कोई प्रायोजन करने वाला नहीं, हमारी कोई खबर नहीं लेता. और पर्स खोलने से इनकार करने का कारण सिर्फ यही था कि ऐसा न हो कि मेरी कक्षा की सहेलियाँ मेरी हालत को जान जाएं और मुझे लज्जित होना पड़े. मेरी ओर से बे अदबी हुई है तो इस के लिए मैं आप सभी से माफी चाहती हूँ।

यह ऐसा कठोर दृश्य था कि सभी की आँखें डबडबा गईं, अल्लाह तआला प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी मजबूरी से बचाए, और ऐसे बुरे दिन किसी को देखने न पड़ें.

भाइयो और बहनो! यह दृश्य उन दुखद दृश्यों में से एक है, जो संभव है हमारे पड़ोस में हो और हम उसे न जान रहे हों, या हम भी ऐसे लोगों से नज़रें ओझल किए हुए हों.

 

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