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قناة الجامع لعلوم القرآن - Al-Jami' Channel for Quranic Sciences

वह चिज़ों जिन से रोज़ा नहीं टूटता है

जिन चिज़ों के करने से रोज़ा नहीं टूटता है।रमज़ान के महीने की बर्कतों  से हम उसी समय लाभ उठा सकते हैं जब हम अपने बहुमूल्य समय का सही प्रयोग करेंगे, इस कृपा, दया और माफी वाले महीने में अल्लाह तआला की इबादत और ज़िक्र व अज़्कार और प्रत्येक प्रकार के पूण्य के कार्य केवल अल्लाह और उस के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का अनुसरण करते हुए किया जाए और वह इबादतें की जाए जिसके करने से पुण्य प्राप्त हो और हमारी झोली पुण्य से भर जाए और हमारा दामन पापों से पाक साफ हो जाए और उन कामों से दूर रहा जाए जिस के कारण इस पवित्र महीने की बर्कत तथा अल्लाह की कृपा, माफी से हमें महरूम ( वंचित) कर दे।

रमज़ान के महीने की सब से महत्वपूर्ण इबादत रोज़ा (ब्रत) है। जिसे उसकी वास्तविक स्थिति से रखा जाए और उन कर्मों तथा कार्यों से दूर रहा जाए जो रोज़े को भंग (खराब) कर दे।

रोज़े रखने के लिए सब से पहले रात या सुबह सादिक़ से पहले ही रोज़ा रखने की नियत किया जाए। इस लिए कि जो व्यक्ति रात में ही रोज़ा की नियत नही करेगा, उस का रोज़ा न होगा। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कथन हैः” जो व्यक्ति रात ही से रोज़ा की नियत न करे, उस का रोज़ा नही। ” ( अल- मुहल्लाः इब्नि हज़्म, अल-इस्तिज़्कारः इब्नि अब्दुल्बिर)

रोज़े की हालत में यदि कोई भूल कर खा पी ले तो उस का रोज़ा भंग नहीं होता जैसा कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फरमान हैः

من أكل ناسيًا، وهو صائمٌ، فليُتِمَّ صومَه، فإنما أطعمَه اللهُ وسقاهُ.  – صحيح البخاري: 6669 و صحيح مسلم: 1155

जिसने रोज़ा रखते हुए भूल कर खा पी लिया, तो वह अपने रोज़े को जारी रखे। बेशक अल्लाह ने उसे खिलाया और पीलाया है। (सही बुखारीः 6669 व सही मुस्लिमः 1155)

इस हदीस से स्पष्ट हुआ कि भूल कर खाने या पीने से रोज़ा नहीं टूटता है। रोज़ेदार को जब याद आए कि वह रोज़े से है, मुंह में मौजूद नवाले को फेंक दे और कुल्ली कर के रोज़े को जारी रखे, उस का रोज़ा सही होगा।

तो उन्हीं चीजें के करने से रोज़ा टूट जाता है। जिन चीज़ों के प्रति हदीस या क़ुरआन से प्रमाणित है और रोज़े की स्थिति में उन से मना किया गया है। इनके अलावा वस्तुओं के करने से रोज़ा नहीं टूटता है। परन्तु कुछ चीज़े के प्रति लोगों में रोज़े के टूटने का आशंका हैं। परन्तु उस से रोज़ा नहीं टूटता है।

जिन चीज़ों के करने से रोज़ा नहीं टूटता है।

1-    आंख और नाक में एक दो बूंद दवा (औषधि) डालने से रोज़ा नहीं टूटता, जो गले तक नहीं पहुंचे।

2.    शरीर के सुराखों से जाने वाले पानी और तेल से रोज़ा नहीं टूटता है।

3.    जांच के कारण शरीर से निकाले जाने वाले थोड़ा खून से रोज़ा नहीं टूटता है।

4.    रोग के कारण इंजेक्शन लेने से रोज़ा नहीं टूटता है। जैसे कि सूगर की बिमारी के लिए इंसुलीन का इंजेक्शन आदि सिवाए भूक मारने और शक्ति पहुंचाने वाले इंजेक्शन से रोज़ा टूट जाता है।

5.   सुरमा लगाने से रोज़ा नहीं टूटता है।

6.   खुश्बू लगाने से रोज़ा नहीं टूटता है।

7.    दांतून करने से रोज़ा नहीं टूटता है। बल्कि सुन्नत से प्रमाणित है कि दोपहर से पहले करना अच्छा है यदि कोई दोपहर के बाद भी मिस्वाक करता है तो कोई बात नहीं परन्तु मिस्वाक करते समय मुंह से निकलने वाले धूक को न निगलना चाहिए।

8.   पत्नी को धोड़ा बहुत चुम्मा लेने और शरीर से शरीर मिला कर सोने से रोज़ा नहीं टूटता है। परन्तु चुम्मा लेने और शरीर से शरीर मिला कर सोने से दोनों में संभोग की इच्छा उत्पन्न न हों और रोज़े की सीमा का उल्लंघन न हों, तो पति और पत्नी इस प्रकार रह सकते हैं, यदि पति और पत्नी के इस प्रकार रहने में रोज़े की सीमा का उल्लंघन का भय हों। तो दोनों दूर रहेंगे। जैसा कि आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) की हदीस से पता चलता है।

9.   रात में पत्नी से संभोग किया और सो गये और आंख फजर के बाद खुली तो वह उठ कर गुस्ल करेगा और रोजा रखेगा जैसा कि आईशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) की हदीस से प्रमाणित है कि ” रसूल (सल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी पत्नी के साथ रहने के कारण जनाबत से होते और फजर हो जाता और फिर उठ कर गुस्ल करते और रोज़ा जारी रखते थे। ” (सही बुखारी, सही मुस्लिम)

परन्तु फजर की नमाज कज़ा न की जाए बल्कि फजर की नमाज़ उस के समय में पढ़ी जाए। क्योंकि रोज़े की तरह फजर की नमाज़ उस के समय में पढ़ना अनिवार्य है।

10.   दिन में सोने की स्थिति में स्पनदोष होने के कारण रोज़ा नहीं टूटता है। क्योंकि यह उस के शक्ति से बाहर है। परन्तु उठने के बाद गुस्ल करेगा यदि कोई नमाज का समय हो तो नमाज़ पढ़ेगा।

11.   पानी में नहाने और डुपकी लगाने से रोज़ा नहीं टूटता है। अगर्चे के कुछ विद्वानों इसे मक्रूह माना है।

12.   यदि पत्नी का पति गुस्से वाला हो तो नमक चखने के लिए खाना चख सकती हैं। परन्तु कांठ (हलक) से निचे न पहुंचे। सालन को जबान पर रखने के बाद थूक देगाी, हलक के नीचे नहीं ले जाएगी।

13.   स्प्रेयर चिकित्सा के प्रयोग भी रोज़ा नहीं टूटता है।

इनके अलावा भी विद्वानों ने कुछ बातें बयान फरमाया जिस से रोज़े नहीं टूटता है। क्योंकि रोज़ा ईबादत है और रोज़े के भंग होने के लिए कुरआन और हदीस से दलील चाहिये।

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