कुरआन क्या है ?

सृष्टि की जीविका सृष्टा के ज़िम्मे है

जीविकाजीविका और आर्थिक समृद्धि की समस्या उन समस्याओं में से एक है जिसने आज लोगों की निंद हराम कर रखी है, इंसान सुबह सवेरे अपने आराम को छोड़ कर घर से निकलता है ताकि अपने परिवार के लिए उत्तम जीविका की व्यवस्था कर सके, उन्हें सुखी जीवन प्रदान कर सके, वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपने शरीरिक विश्राम को बलि देता है, फिर जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो उनके विवाह की व्यवस्था के लिए परेशान रहता है। यह है जीविका की समस्या आज अधिक लोगों की दृष्टि में…अब प्रश्न यह है कि जीविका के सम्बन्ध में इस्लाम की क्या राय है, इसी विषय पर इस लेख में प्रकाश डाला गया है।  

प्रत्येक सृष्टि की जीविका का ज़िम्मदार सृष्टा हैः

अल्लाह ने जमीन पर चलने वाली हर प्राणी चाहे मनुष्य हो या जिन्न, पशु हो या पक्षी, छोटी हो या बड़ी, समुद्र में हो या ख़ुश्की में हर एक की जीविका की जिम्मेदारी ले रखी है और हर एक को उसकी आवश्यकता के अनुसार जीविका पहुंचा रहा है. अल्लाह का एक नाम “अल-राज़िक़” الرازقऔर “अल-रज्ज़ाक़” الرزاق है जिसका अर्थ होता है निरंतर जीविका पहुंचाने वाली महीमा। अल्लाह ने इंसान को पैदा किया और वही उसे जीविका भी पहुंचा रहा है। अल्लाह ने फरमायाः

اللَّـهُ الَّذِي خَلَقَكُمْ ثُمَّ رَزَقَكُم       سورة الروم 40

“वही अल्लाह है जिसने तुझे पैदा किया फिर जीविका पहुंचाया” (सूरः अल-रूम 40 )

 दूसरे स्थान पर अल्लाह ने फरमायाः

إِنَّ اللَّهَ هُوَ الرَّزَّاقُ ذُو القُوَّةِ المَتِينُ      سورة الذاريات: 58

         निश्चय ही अल्लाह ही है रोज़ी देनेवाला, शक्तिशाली, दृढ़ ( सूरः अल-ज़ारियात 58 ) 

बल्कि अल्लाह ने अपनी सारी सृष्टि को इतमिनान दिलाया कि धरती पर चलने फिरने वाली जितनी भी सृष्टि है सब को जीविका पहुंचाना उसी के ज़िम्मे है, अल्लाह के इस आदेश पर चिंतन मनन करें  

وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ إِلَّا عَلَى اللَّـهِ رِزْقُهَا     سورة هود 6

धरती में चलने-फिरने वाली जो प्राणी भी है उसकी रोज़ी अल्लाह के ज़िम्मे है। (सूरः हूद, 6) अर्थात् अल्लाह ने स्वयं पर अनिवार्य कर लिया है कि वह धरती पर चलने वाली सारी सृष्टि को जीविका पहुंचाये। अब सृष्टि को जीविका के सम्बन्ध में परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।

एक व्यक्ति ने देखा कि एक पक्षी अपनी चोंच में खाद्य सामग्री ले कर एक टीले पर जाती है और वहाँ रख कर आ जाती है, जब निरंतर कई बार पक्षी का आना जाना हुआ तो वह वास्तविकता जानने के लिए टीले पर चढ़ा, क्या देखता है कि उसके अंदर एक खोह है जिस में अंधा अजगर साँप सो रहा है जो बड़ी आयु का होने के कारण हिल भी नहीं सकता. पक्षी खाद्य पदार्थ लेकर आती है, अजगर सांप को हरकत देती है, अजगर अपना मुंह खोलता है और पक्षी अपनी चोंच से उसके मुँह में खाना डाल देती है.

जी हाँ! अल्लाह अपनी सारी सृष्टि को चाहे वे जहां कहीं भी हो जीविका पहुंचा रहा है, इनसान के दुनिया में आने से पूर्व ही उसकी जीविका की समस्या का समाधान कर दिया है.

इस लिए इंसान को जीविका के सम्बन्ध में संतुष्ट रहना चाहिए, अल्लाह के रसूल सल्लाल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः “ऐ लोगो! अल्लाह से डरो और भली-भांति जीविका की खोज करो, निःसंदेह एक इंसान की उस समय तक मृत्यु नहीं हो सकती जब तक मरने से पहले अपनी जीविका प्राप्त न कर ले, यधपि कुछ देर से ही पाए। अतः अल्लाह से डरो और भली-भांति जीविका की खोज करो। ” ( इब्ने माजः )

अल्लाह के ख़ज़ाने में कुछ कमी नहीं आतीः

यदि अल्लाह से उसकी सारी सृष्टि सवाल करे और सब को उसकी इच्छा के अनुसार अल्लाह प्रदान कर दे तो इस से उसकी बादशाहत में तनिक भी कमी न आयेगी। जैसा कि सहीह मुस्लिम में है, हज़रत अबू ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक हदीसे क़ुदसी में बयान फरमाया, अल्लाह फरमाता हैः

يا عبادي إني حرمت الظلم على نفسي، وجعلته بينكم محرما، فلا تظالموا، يا عبادي كلكم ضال إلا من هديته فاستهدوني أهدكم، يا عبادي كلكم جائع إلا من أطعمته فاستطعموني أطعمكم، يا عبادي كلكم عار إلا من كسوته فاستكسوني أكسكم، يا عبادي إنكم تخطئون بالليل والنهار وأنا أغفر الذنوب جميعا فاستغفروني أغفر لكم، يا عبادي إنكم لن تبلغوا ضري فتضروني ولن تبلغوا نفعي فتنفعوني، يا عبادي لو أن أولكم وآخركم وإنسكم وجنكم كانوا على أتقى قلب رجل واحد منكم ما زاد ذلك في ملكي شيئا، يا عبادي لو أن أولكم وآخركم وإنسكم وجنكم كانوا على أفجر قلب رجل واحد منكم ما نقص ذلك من ملكي شيئا، يا عبادي لو أن أولكم وآخركم وإنسكم وجنكم قاموا في صعيد واحد فسألوني فأعطيت كل إنسان منهم مسألته ما نقص ذلك مما عندي إلا كما ينقص المخيط إذا أدخل البحر …(رواه مسلم)

“ऐ मेरे बन्दो! मैं ने स्वयं पर अत्याचार को अवैध ठहराया है और तुम्हारे बीच भी उसे अवैध कर दिया है, इस लिए परस्पर अत्याचार मत करो, ऐ मेरे दासो! तुम सब भटके हुए हो सिवाए उसके जिसको मैं ने हिदायत दी, तो मुझ से हिदायत मांगो,मैं तुम्हें हिदायत दूंगा, तुम सब भूखे हो, सिवाए उसके जिसे मैंने खाना खिलाया तो मुझ से खाना मांगो, मैं तुम्हें खिलाऊंगा, ऐ मेरे बन्दो! तुम सब नंगे हो, सिवाए उसके जिसे मैं ने लिबास पहनाया, इस लिए मुझ से लिबास मांगो, मैं तुम्हें पहनाऊंगा, ऐ मेरे बन्दो! तुम रात दिन गुनाह किया करते हो मैं तुम्हारे पापों को क्षमा किया करता हूं, तो मुझ से तुम अपने पापों की क्षमा मांगो, मैं तुम्हें क्षमा कर दूंगा, ऐ मेरे बन्दो! तुम कदापि हानि पहुंचाने की पोज़ीशन में नहीं हो सकते कि मुझे हानि पहुंचाओ, और तुम कदापि लाभ पहुंचाने की पोज़ीशन में नहीं हो सकते कि तुम मुझे लाभ पहुंचाओ। ऐ मेरे बन्दो! यदि तुम्हारे अगले और तुम्हारे पिछले, तुम्हारे इनसान और तुम्हारे जिन्न, तुम में सब से बढ़ कर परहेज़गाह व्यक्ति के दिल के समान हो जाएं तो यह चीज़ मेरी बादशाही में कुछ बढ़ा नही सकती। ऐ मेरे बन्दो! यदि तुम्हारे अगले और तुम्हारे पिछले, तुम्हारे इनसान और तुम्हारे जिन्न, तुम में सब से बढ़ कर बुरे व्यक्ति के दिल के समान हो जाएं तो यह चीज़ मेरी बादशाही में कोई कमी पैदा नहीं कर सकती। ऐ मेरे बन्दो! यदि तुम्हारे अगले और तुम्हारे पिछले, तुम्हारे इनसान और तुम्हारे जिन्न, सब एक मैदान में खड़े हों और मुझ से मांगें और मैं हर व्यक्ति की मांग पूरी कर दूं तो इस से कुछ भी कमी नहीं आ सकती जो मेरे पास है सिवाए उस कमी के जो समुद्र में एक सूई दाखिल होने के बाद पैदा करती है। … (सही मुस्लिम)

जब जीविका की ज़िम्मेदारी अल्लाह ने ले रखी है तो परेशानी क्यों

وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ * فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالأَرْضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ ” الذاريات 22، 23

और आकाश मे ही तुम्हारी रोज़ी है और वह चीज़ भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है (सूरः अल- ज़ारियात 22,23)

इसी लिए अल्लाह ने ऐसे लोगों की निंदा की है जो अपने बच्चों को अकाल और भूखमरी के भय से क़त्ल कर देते हैं। अल्लाह ने फरमायाः

وَلاَ تَقْتُلُوا أَوْلادَكُمْ خَشْيَةَ إِمْلاقٍ نَّحْنُ نَرْزُقُهُمْ وَإِيَّاكُمْ إِنَّ قَتْلَهُمْ كَانَ خِطْئاً كَبِيراً ”  الإسراء: 31

और निर्धनता के भय से अपनी सन्तान की हत्या न करो, हम उन्हें भी रोज़ी देंगे और तुम्हें भी। वास्तव में उनकी हत्या बहुत ही बड़ा अपराध है (सूरः अल- इसरा 31) दूसरे स्थान पर अल्लाह ने फरमायाः

وَكَأَيِّن مِّن دَابَّةٍ لاَّ تَحْمِلُ رِزْقَهَا اللَّهُ يَرْزُقُهَا وَإِيَّاكُمْ وَهُوَ السَّمِيعُ العَلِيمُ “[العنكبوت:60

कितने ही चलनेवाले जीवधारी है, जो अपनी रोज़ी उठाए नहीं फिरते। अल्लाह ही उन्हें रोज़ी देता है और तुम्हें भी! वह सब कुछ सुनता, जानता है (सूरः अल- अंकबूत 60)

जब इंसान को यह विश्वास हो जाता है कि अल्लाह ही हमारी रोज़ी का ज़ामिन है तो वह कभी रोज़ी के संबंध में परेशान नहीं होता, उसका दिल हमेशा शान्ति होता है, उसकी तबीअत सुकून से परिपूर्ण होती है, लेकिन यह दुनिया कार्य-स्थल है, अल्लाह ने रोज़ी की ज़िम्मेदारी जरूर ली है लेकिन मनुष्य के लिए आवश्यक है कि वे रोज़ी प्राप्ती के लिए हर प्रकार का प्रयत्न करें.

जीविका की अधिकता अल्लाह के खुश होने का प्रमाण नहीः

अल्लाह हर सृष्टि को जीविका पहुंचा रहा है लेकिन कभी अपने आज्ञाकारों पर जीविका तंग कर देता है और अवज्ञाकारों और उसके आदेशों का हनन करने वालों को अधिक से अधिक देता है, इस लिए किसी को अधिक से अधिक जीविका मिलना इस बात का प्रमाण नहीं कि वह अल्लाह का प्रिय है या अल्लाह उस से खुश है। इसी लिए अल्लाह ने उन समृद्ध काफिरों और मुश्रिकों की निंदा की जो ऐसा विचार रखते हैं, अल्लाह ने फरमायाः

 أَيَحْسَبُونَ أَنَّمَا نُمِدُّهُم بِهِ مِن مَّالٍ وَبَنِينَ * نُسَارِعُ لَهُمْ فِي الخَيْرَاتِ بَل لاَّ يَشْعُرُونَ ” [المؤمنون: 55-56

  क्या वे समझते है कि हम जो उनकी धन और सन्तान से सहायता किए जा रहे है, (55) तो यह उनके भलाइयों में कोई जल्दी कर रहे है? (56) नहीं, बल्कि उन्हें इसका एहसास नहीं है।

जब जीविका अल्लाह पहुंचाता है तो पूजा उसी की होनी चाहिएः

अन्त में हम यह भी बयान करते चलें कि अल्लाह ने जीविका पहुंचाने को अपने वजूद के प्रमाण के रूम में पेश किया है कि जब वही सारी सृष्टी को जीविका पहुंचा रहा है तो रब और प्रभू भी वही होना चाहिए न कि अन्य देवी देवता, देखिए निम्न कुछ आयतें

1.       कहो, “तुम्हें आकाश और धरती से रोज़ी कौन देता है, या ये कान और आँखें किस के अधिकार में है और कौन जीवन्त को निर्जीव से निकालता है और निर्जीव को जीवन्त से निकालता है और कौन यह सारा इन्तिज़ाम चला रहा है?” इसपर वे बोल पड़ेगे, “अल्लाह!” तो कहो, “फिर आख़िर तुम क्यों नहीं डर रखते?” (सूरः यूनुस 31)

2.       और अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए तुम्हारी सहजाति पत्नियों बनाई और तुम्हारी पत्नियों से तुम्हारे लिए पुत्र और पौत्र पैदा किए और तुम्हे अच्छी पाक चीज़ों की रोज़ी प्रदान की; तो क्या वे मिथ्या को मानते है और अल्लाह के अनुग्रह ही का उन्हें इनकार है? (सरः अल नहल 72)

3.       या वह जो सृष्टि का आरम्भ करता है, फिर उसकी पुनरावृत्ति भी करता है, और जो तुमको आकाश और धरती से रोज़ी देता है? क्या अल्लाह के साथ कोई और प्रभ पूज्य है? कहो, “लाओ अपना प्रमाण, यदि तुम सच्चे हो।” (सूरः अल-नमल 64)

4.       अल्लाह ही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुम्हें रोज़ी दी; फिर वह तुम्हें मृत्यु देता है; फिर तुम्हें जीवित करेगा। क्या तुम्हारे ठहराए हुए साझीदारों में भी कोई है,जो इन कामों में से कुछ कर सके? महान और उच्च है वह उसमें जो साझी वे ठहराते है (सूरः अल-रूम 40)  

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