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हराम कमाई : कारण, प्रभाव और इलाज

हराम कमाई

हराम कमाई बहुत जल्द नष्ट हो जाती है।

हराम कमाई एक नैतिक बीमारी है, मानव प्रकृति और दुनिया का सारा धर्म इसके खिलाफ है। जब हम किसी के सम्बन्ध में सुनते हैं कि फलां आदमी हराम कमाता या खाता है तो तबीयत में हमें उससे नफरत सी पैदा होने लगती है, इसीलिए इस्लाम ने हराम कमाई के सभी स्रोतों को खोल-खोल कर बयान कर दिया और उनकी वैधता स्पष्ट कर दी।

इसके बावजूद अगर हम मुस्लिम समाज में झांक कर देखें तो आज हमारे बीच हराम कमाई की विभिन्न आकृतियों पाई जाती हैं।

उदाहरण-स्वरूप ब्याज का लेन देन, जिसके सभी रूप हराम हैं, चाहे उसे व्यक्तिगत रूप में बरता जाए या सामूहिक रूप में, चाहे साहूकारों से लेनदेन हो या सूदी बैंकों से। और सूदख़ोर को अल्लाह और उसके रसूल की ओर से युद्ध की घोषणा है, ब्याज का एक दिरहम जान बूझ कर खाना अल्लाह की दृष्टि में 36 बार व्यभिचार से भी बदतर है, ब्याज के तिहत्तर स्तर हैं जिनमें सरल स्तर अपनी मां के साथ मुंह काला करना है।

हराम कमाई में चोरी का भी दर्जा आता है और जो उसके दोषी हों उसके लिए इस्लाम ने यह सजा तय की कि उसका हाथ काट दिया जाये, किसी का माल छीन लेना और शक्ति के बलबोते पर उसे दबा लेना भी हराम की श्रेणी में आता है जिसके बारे में बुखारी और मुस्लिम की रिवायत के अनुसार अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बयान किया किः

 من أخذ شبرا من الأرض ظلما طوقہ من سبع أرضین – بخاری ومسلم

जिसने ज़ल्म करते हुए किसी की एक बालिश्त जमीन छीन ली उसके गले में सातों जमीन का तौक़ पहनाया जाएगा।

रिश्वत लेना और देना भी हराम की श्रेणी में आता है जिसके लेने और देने वाले पर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लानत भेजी है (सुनन अबी दाऊद हदीस न. 3580)

सामान की कमी को छिपाकर बेचना भी हराम के संदर्भ में आता है, जिस से माल जाहिर में तो बिक जाता है लेकिन उस से  बर्कत छीन ली जाती है। (बुखारी और मुस्लिम) और यह एक तरह का धोखा भी है जिसके बारे में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया:

من غش فلیس منا – مسلم

जिसने धोखा दिया वह हम में से नहीं।(मुस्लिम)

ठग कर अनाथों का माल खाना भी हराम है और ऐसा करने वाले वास्तव में अपने पेट में आग डालते हैं। (सूरः निसाः 10) बिना किसी शरई उज़्र के भीख़ मांगना और दूसरों के सामने हाथ फैलाना भी हराम के संदर्भ में आता है। ज़कात वाजिब होने के बाद उसकी अदाएगी न करना भी हराम है और यही सोना चांदी जिसे अपने पास जमा करके रखा था कल क़यामत के दिन उसे आग में तिपाया जाएगा और उसके माथे, उसके पहलू और पीठ दागे जाएंगे। हराम माल का व्यापार जैसे मादक पदार्थ, मूर्तियां और स्टेचू, सुअर का मांस, गाने बजाने के उपकरण आदि यह सब हराम कमाई के संदर्भ में आते हैं। उसी तरह ड्यूटी में कोताही करना, ठीक से काम न करना या कार्य का अनुभव न होने के बावजूद किसी कंपनी से जुड़े रहना हराम कमाई की श्रेणी में आता है।

एक आदमी हराम कमाई में क्यों लगा रहता है या हराम व्यवसाय क्यों अपनाता है? तो इसकी एक वजह तो यह बनती है कि वह हराम और हलाल की हक़ीक़त से अनभिज्ञ होता है, कुछ लोग यह सोचकर हराम व्यवसाय अपनाये होते हैं कि इसमें कोई हर्ज नहीं हालांकि वह असल में हराम होता है। इस लिए ज़रूरी है कि इंसान हलाल और हराम की पहचान रखता हो।

उमर फारूक रज़ियल्लाहु अन्हु कभी कभी बाजार जाते और कुछ व्यापारियों को डंडे से मारते थे और कहते थे हमारे बाजार में वही सामान बेचे जो (व्यापार के संबंध में) देनी अंतर्दृष्टि रखता हो वरना चाहे न चाहे ब्याज का माल खा लेगा।

दूसरा कारण अल्लाह की सही पहचान न होना और उसकी निगरानी का एहसास दिल में पैदा न होना है। अगर वास्तव में वह अल्लाह की पहचान रखता और उसकी निगरानी का एहसास उसके दिल में व्याप्त रहता तो उसे कैसे हिम्मत होती कि हराम माल कमाए, रिश्वत ले, ब्याज ले, धोखा देकर माल बेचे। उसी तरह मानव निगरानी न पाया जाना भी हराम कमाई का कारण बनता है, अगर हराम कमाने वाले की खबर ली जाए, उसे सख्त से सख्त सजा दी जाए और हराम कमाई के रास्ते को बंद करने की पूरी कोशिश की जाए तो बहुत हद तक हराम कमाई पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

और जब एक आदमी हराम कमाई का आदी हो जाता है तो उसकी वजह से उसका दिल मर जाता है, वह सिर से पैर तक पापों में डूब जाता है और उसे इसका एहसास भी नहीं होता यहां तक कि कभी-कभी उसी हालत में उसकी मौत भी हो जाती है, इस लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया:

انہ لایدخل الجنۃ لحم نبت من سحت، النار أولی بہ – ترمذی: 614

जो मांस हराम माल से पला हो वह स्वर्ग में प्रवेश नहीं हो सकता, उसके को नरक ही बेहतर है।  (तिर्मिज़ी: 614)

हराम माल खाने वाले की दुआ भी स्वीकार नहीं होती, सही मुस्लिम की एक लंबी हदीस है जिसमें अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया कि एक आदमी है जो लम्बी यात्रा करता है,  सिर के बाल बिखरे हुए और शरीर धूल से भरा है, आकाश की ओर हाथ उठाता है और दुआ करता है ऐ मेरे रब हे ऐ मेरे रब, हालांकि उसका खाना हराम का है, उसका पीना हराम का है और उसका वस्त्र हराम से है तो आखिर ऐसे व्यक्ति की दुआ कैसे स्वीकार की जाएगी।

कभी कभी यही हरामख़ोरी आपदाओं और मुसीबतों का कारण सिद्ध होता है, ब्याज की वजह से पिछले कुछ वर्षों में विश्व स्तर पर जो आर्थिक संकट आया था यह उसका स्पष्ट उदाहरण है। अल्लाह ने ख़ुद कहाः

و يمحق الله الربا – سورة البقرة: 276

 अल्लाह ब्याज को मिटाता है। (सूरः अल-बक़राः 276)

अब हमारे मन में यह सवाल पैदा हो सकता है कि हराम वसूली से बचने का तरीका क्या होना चाहिए?

तो इस संबंध में पहले एक मुसलमान को चाहिए कि वे इस्लाम के वित्तीय प्रणाली को समझता हो, क्या वैध है और क्या मना किया है की उसे पूरी जानकारी हो, जब एक बंदा हलाल को हलाल और हराम को हराम समझेगा तो उसका विवेक खुद उसे कचौके लगाएगा कि तुम हराम-खोरी क्यों कर रहे हो

उसी तरह एक दास को चाहिए कि हलाल और हराम के मामले में भी अल्लाह की निगरानी को खुद पर तारी रखे, जब उसे पता चल चुका है कि यह काम हराम है और जब उसे कोई हराम मामला करने की नौबत आती है तो मामूली पानी की एक बूंद से जन्म लेने वाले मनुष्य से छिप कर वह मामला करता है ताकि कोई जान न ले, अब अल्लाह के सामने पूरी ढ़िटाई और बेशर्मी के साथ यही मामला करने के लिए उसे कैसे हिम्मत हो सकती है? वह अल्लाह जो उसकी आंखों के विश्वासघात और दिल के छिपे रहस्य को जानता है। वह अल्लाह उसकी सुन रहा है, उसे जान रहा है, उसे देख रहा है और इसकी निगरानी कर रहा है।

तीसरे नंबर पर सरकार और समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि जो लोग आर्थिक संघर्ष में पीछे रह चुके हैं उनके लिए आजीविका के साधन मुहैया किए जाएं, वरना वह अपनी भूख मिटाने के लिए निषेध सूत्रों का सहारा लेंगे ही।

चौथे नंबर पर हराम आजीविका अपनाने वालों से दूरी अपनाने, हलाल कमाने वालों की संगत में बैठें, क्योंकि संगति का एक आदमी पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

उसी तरह सलफ सालेहीन के किस्से पढ़ें कि कैसे उन्होंने हलाल ख़ोरी को अपनी पहचान बनाए रखा और हराम से बाल-बाल बचते रहे। एक दिन की घटना है हज़रत अबु बकर रज़ियल्लाहु अन्हु का नौकर खाने का कोई सामान लेकर आता है और अपने मालिक को पेश करता है, हज़रत अबु बकर रज़ियल्लाहु अन्हु ये पूछे बिना खा लेते हैं कि यह कहां का है? फिर बाद में जब नौकर ने बताया कि अज्ञानताकाल में मैं एक व्यक्ति से झूठ मूट की कहानत की थी आज उसने मेरा उसी कहानत की मजदूरी दी है, यह वही है जो आपने अभी खाया है। यह सुनना था कि अबू बकर रज़ियल्लाहुअन्हु ने तुरंत अपने गले में उंगली डाला और जो कुछ खाया था उल्टी कर दी, फिर कहा:

لو لم تَخرُج اِلامع نفسی لأخرجتُھا

 “अगर इसे निकालने में मेरी जान भी चली जाती तो भी इसे निकाल बाहर करता” ।

एक अंतिम बात यह है कि लोगों को मेहनत पर उभारा जाए, सुस्ती, काम चोरी और दूसरों के कौर पर पलने से रोका जाए। यही कारण है कि एक स्वस्थ इंसान जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास मांगने के लिए आता है तो उसे कुछ देने के बजाय उसे मेहनत से कमाने पर उभारते हैं।

सुनन अबी दाऊद की रिवायत है एक दिन एक आदमी अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और आप से सवाल किया कि कुछ माल या खाना दिया जाए, आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उससे पूछा: तुम्हारे घर में कुछ है? उसने कहा: हाँ, एक चादर है जिसका कुछ भाग पहनने और कुछ हिस्सा बिछाने के काम आता है और एक प्याला है जिसमें पानी पीते हैं, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे मंगवाया और उसे दो दिरहम में बेच दिया फिर दो दिरहम ले कर उसे देते हुए कहा कि एक दिरहम से खाना खरीद लो और घर में रख दो और एक दिरहम से एक कुल्हाड़ी खरीद कर लाओ, तः उसने ऐसा ही किया और कुल्हाड़ी खरीद कर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सेवा में आया, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने हाथ से उसमें लकड़ी बांधा, फिर उस आदमी से कहा: जाओ लकड़ियाँ काटो और उन्हें बीचो, और हम तुम्हें पंद्रह दिन तक न देख सकें। इस प्रकार वह आदमी गया और लकड़ी काटने और बेचने लगा, जब वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सेवा में आया तो उसने दस दिरहम कमा रखा था, उनमें से कुछ से कपड़े खरीद लिया और कुछ से खाना, यह देखकर अल्लाह रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: यह इस बात से बेहतर है कि कल क़यामत के दिन अल्लाह के पास आओ तो तुम्हारे चेहरे पर मांगने का निशान हो।

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